Blogs about: संवेदना

दूसरे के कहने पर मार्ग बदलना नहीं-आलेख3 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जब अपने किसी लक्ष्य या उद्देश्य का पता हो और उसी मार्ग पर हमारे कदम बढ़ रहे हों तो किसी के कहने पर आ … more →

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आखिर इसमें खास क्या है-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जहां तक मेरी जानकारी है खबर में यही था कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद उम्मीदवार ओबामा अपनी जेब में र … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, दीपक भारतदीप, भारत, मस्तराम, समाज

कभी उजड़ता तो कभी महकता है चमन-कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको देखने के लिय मचलता है मन अगर वह पास आते हैं तो हो जाता है अमन बातें होतीं हैं प्यारी कभी होती … more →

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मन के समंदर में लहर और नाव का खेल2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन के समंदर में उठती लहरें कई नाम है जो नाव की तरह लहराते निकल जाते हैं जिसका किनारा आ गया वह साथ छो … more →

Tags: कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, समाज, हिंदी साहित्य, Blogger, Blogging

बिना शक्ति दिखाये कौन यकीन करेगा-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत सरल भाव रखने पर लोग सीदा-सादा समझकर अपमान करने लगते हैं। अगर मान का मोह छोड़कर किसी के अभियान … more →

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दर्द की बजाय लिखना पसंद है संघर्ष पर3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्र्जाल पर मैं लिखता हूं इसका अर्थ यह कदापि नहीं लिया जाना चाहिए कि मै किसी उच्च मध्यम परिवार से … more →

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पुरुष क्यों नही कर रहे महिलाओं की अस्मिता की रक्षा-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आचार्य चाणक्य ने कहा है कि स्त्री को दीपक की तरह आवरण में रखना चाहिए। इसका आशय यह है कि पुरुष पर यह … more →

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नाम, छद्मनाम और बेनाम-आलेख 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नाम दोस्तों के होते हैं और वह पहचान लिए जाते हैं इसलिए जब वह किसी को निपटाना चाहते हैं तो उसकी कमिया … more →

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अपना तनाव और थकावट बढाते हैं खुद लोग-आलेख 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हमारे दर्शन के अनुसार मनुष्य योनि बहुत पुण्य करने पर मिलती है और अगर कोई इस योनि में दान-पुण्य और धर … more →

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चलना ज़रा संभल कर-हास्य कविता 6 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चिल्ला-चिल्लाकर करते हैं प्रेम मजे के लिए चाहिए जैसे गेम आखों में बसाए रहते हैं पाश्चात्य सभ्यता वाल … more →

Tags: arebic, अनुभूति, कला, कविता, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, शब्द, शायरी

जैसा हम कहैं वैसा ही दिख-कविता साहित्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लोगों का समूह एकत्रिक कर उसमें फूँकने के लिए जजबात उनका सन्देश है ”तू उधर से इधर आया है तो इधर … more →

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भ्रम कितना भी चमके, सच की तरह नहीं टिकता-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: काला बाजार में अब कुछ नहीं दिखता सारा काला माल खुले बाजार में बिकता काला पैसा अब कोई सम्मान की बात … more →

Tags: Blogroll, Kavita, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat

चाणक्य नीति:जिससे कुछ मिलने की आशा हो उससे मधुर व्यवहार करें1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिसके मन में पाप है, वह सौ बार तीर्थ स्नान करने के बाद भी पवित्र नहीं हो सकता, जिस प्रकार मदिरा का … more →

Tags: Blogroll, Vichar, Global Dashboard, अभिव्यक्ति, संपादकीय, bharat, साहित्य, Education, Bloging

चजई-करें छोटे का अपमान-बेचें बडे को सम्मान

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो सच से लड़ना जानते हैं कोई उनको सपने बेच नहीं सकता जज्बातों के व्यापारी जो बेचते हैं उनको कोई गरीब … more →

Tags: कला, कविता, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, शायरी, शेर, शेर-ओ-शायरी

विकास और विनाश-लघुकथा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गरीब किसान अपने खेत में हल जोत रहा था. उसी समय एक खूबसूरत चेहरे वाला सूट-बूट पहने एक शख्स उसके सामन … more →

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चजई-ब्लोगर रतन और खंजर 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रतन-रतन कर सब उसे लेने एक बाग़ की तरह भागे जा रहे थे कहीं लगी दो ब्लोगरों को यह खबर अपने स्थाई टिप … more →

Tags: शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, शेर, अनुभूति, चिन्तन, साहित्य

कौटिल्य अर्थशास्त्र:शत्रु पर इन्द्रजाल का भी प्रयोग करें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.विशेष ज्ञान से संपन्न सत्त्वगुण और दैव की अनुकूलता लिए उधोग और सत असत का विचार का शत्रु पर उपाय का … more →

Tags: विचार, भारत, हिंदी साहित्य, साहित्य, media, Education, Life, Friends, Blogger

ज्योतिष और संयुक्त खाता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पति पत्नी का बैंक में संयुक्त खाता था. पत्नी को रोज सुबह टीवी पर आने वाले ज्योतिष कार्यक्रम में बहुत … more →

Tags: Blogroll, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, चरित्र, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य

मैं अभद्र शब्द लिखूंगा तुम खंडन कर देना 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पहला ब्लोगर घर के दरवाजे से बाहर निकल ही रहा था की दूसरा ब्लोगर वहाँ पहुंच गया। उसे देखकर वह गया औ … more →

Tags: arebic, Art, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, सत्संग, साहित्य


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