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Blogs about: संवेदना

शोर और शांति-हिन्दी कविता (shor aur shanti) 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: शोर कर रही भीड़ में शांति कराने के लिये बहुत तेज आवाज में शोर मचाओगे तो तुम भी शांति के मसीहा हो जाओग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य

दूसरे के कहने पर मार्ग बदलना नहीं-आलेख3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब अपने किसी लक्ष्य या उद्देश्य का पता हो और उसी मार्ग पर हमारे कदम बढ़ रहे हों तो किसी के कहने पर आ … more →

Tags: Blogroll, vididha, inglish, अभिव्यक्ति, vishvaas, अनुभूति, हिंदी साहित्य, साहित्य, media

आखिर इसमें खास क्या है-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जहां तक मेरी जानकारी है खबर में यही था कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद उम्मीदवार ओबामा अपनी जेब में रखन … more →

Tags: Blogroll, inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, भारत, bharat, अनुभूति, हिंदी साहित्य, साहित्य

कभी उजड़ता तो कभी महकता है चमन-कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको देखने के लिय मचलता है मन अगर वह पास आते हैं तो हो जाता है अमन बातें होतीं हैं प्यारी कभी होती … more →

Tags: Blogroll, Kavita, शेर-ओ-शायरी, inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, शेर, अनुभूति

मन के समंदर में लहर और नाव का खेल2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन के समंदर में उठती लहरें कई नाम है जो नाव की तरह लहराते निकल जाते हैं जिसका किनारा आ गया वह साथ छो … more →

Tags: Blogroll, glogbal dashborad, inglish, चिन्तन, हिंदी साहित्य, Shayri, media, Bloging, Life

बिना शक्ति दिखाये कौन यकीन करेगा-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत सरल भाव रखने पर लोग सीदा-सादा समझकर अपमान करने लगते हैं। अगर मान का मोह छोड़कर किसी के अभियान म … more →

Tags: Blogroll, अभिव्यक्ति, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, भारत, India, अनुभूति, हिंदी साहित्य

दर्द की बजाय लिखना पसंद है संघर्ष पर3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्र्जाल पर मैं लिखता हूं इसका अर्थ यह कदापि नहीं लिया जाना चाहिए कि मै किसी उच्च मध्यम परिवार से … more →

Tags: Blogroll, Vichar, inglish, अभिव्यक्ति, meadia, संपादकीय, India, bharat, अनुभूति

पुरुष क्यों नही कर रहे महिलाओं की अस्मिता की रक्षा-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आचार्य चाणक्य ने कहा है कि स्त्री को दीपक की तरह आवरण में रखना चाहिए। इसका आशय यह है कि पुरुष पर यह … more →

Tags: Blogroll, संपादकीय, भारत, bharat, चिन्तन, साहित्य, Education, Internet, Bloging

नाम, छद्मनाम और बेनाम-आलेख 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नाम दोस्तों के होते हैं और वह पहचान लिए जाते हैं इसलिए जब वह किसी को निपटाना चाहते हैं तो उसकी कमिया … more →

Tags: आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, संपादकीय, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य

अपना तनाव और थकावट बढाते हैं खुद लोग-आलेख 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हमारे दर्शन के अनुसार मनुष्य योनि बहुत पुण्य करने पर मिलती है और अगर कोई इस योनि में दान-पुण्य और धर … more →

Tags: Blogroll, glogbal dashborad, अभिव्यक्ति, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य

चलना ज़रा संभल कर-हास्य कविता 6 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चिल्ला-चिल्लाकर करते हैं प्रेम मजे के लिए चाहिए जैसे गेम आखों में बसाए रहते हैं पाश्चात्य सभ्यता वाल … more →

Tags: Blogroll, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, bharat, vishvaas, शेर

जैसा हम कहैं वैसा ही दिख-कविता साहित्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लोगों का समूह एकत्रिक कर उसमें फूँकने के लिए जजबात उनका सन्देश है ”तू उधर से इधर आया है तो इधर … more →

Tags: Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, शेर, अनुभूति, चिन्तन

भ्रम कितना भी चमके, सच की तरह नहीं टिकता-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: काला बाजार में अब कुछ नहीं दिखता सारा काला माल खुले बाजार में बिकता काला पैसा अब कोई सम्मान की बात न … more →

Tags: Blogroll, Kavita, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat

चाणक्य नीति:जिससे कुछ मिलने की आशा हो उससे मधुर व्यवहार करें1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिसके मन में पाप है, वह सौ बार तीर्थ स्नान करने के बाद भी पवित्र नहीं हो सकता, जिस प्रकार मदिरा का … more →

Tags: Blogroll, Vichar, Global Dashboard, अभिव्यक्ति, संपादकीय, bharat, साहित्य, Education, Bloging

चजई-करें छोटे का अपमान-बेचें बडे को सम्मान

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो सच से लड़ना जानते हैं कोई उनको सपने बेच नहीं सकता जज्बातों के व्यापारी जो बेचते हैं उनको कोई गरीब … more →

Tags: Blogroll, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, शेर, सूचना

विकास और विनाश-लघुकथा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गरीब किसान अपने खेत में हल जोत रहा था. उसी समय एक खूबसूरत चेहरे वाला सूट-बूट पहने एक शख्स उसके सामने … more →

Tags: अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य, Education, Friends

चजई-ब्लोगर रतन और खंजर 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रतन-रतन कर सब उसे लेने एक बाग़ की तरह भागे जा रहे थे कहीं लगी दो ब्लोगरों को यह खबर अपने स्थाई टिप्प … more →

Tags: शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, शेर, अनुभूति, चिन्तन, साहित्य

कौटिल्य अर्थशास्त्र:शत्रु पर इन्द्रजाल का भी प्रयोग करें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.विशेष ज्ञान से संपन्न सत्त्वगुण और दैव की अनुकूलता लिए उधोग और सत असत का विचार का शत्रु पर उपाय का … more →

Tags: विचार, भारत, हिंदी साहित्य, साहित्य, media, Education, Life, Friends, Blogger

ज्योतिष और संयुक्त खाता

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पति पत्नी का बैंक में संयुक्त खाता था. पत्नी को रोज सुबह टीवी पर आने वाले ज्योतिष कार्यक्रम में बहुत … more →

Tags: Blogroll, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, चरित्र, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य


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