हमने लिखा था कि वर्तमान संसदीय प्रणाली द्वारा मजदूर वर्ग कभी सत्ता प्राप्त नहीं कर सकता. लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि मजदूर वर्ग चुनाव प्रक्रिया में बिलकुल भाग नहीं लेता. एक वोटर के रूप में वह … more →
नया सर्वहारा पुनर्जागरण नया सर्वहारा प्रबोधनShaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: हमने लिखा था कि वर्तमान संसदीय प्रणाली द्वारा मजदूर वर्ग कभी सत्ता प्राप्त नहीं कर सकता. लेकिन इसका … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: कड़ी जोड़ने के लिए और ऑडियो सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें इस ऑडियो द्वारा शहीद भगत सिंह विचार मंच ने भ … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: इस ऑडियो द्वारा शहीद भगत सिंह विचार मंच ने भारत में होने वाले निरर्थक संसदीय ओर अन्य चुनावों के बारे … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखे : “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते म … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस पोस्ट से सम्बंधित प्राप्त टिप्पणियों के पश्चात् यह ज़रूरी हो गया है कि इस विषय पर वाद-विवाद जारी … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: मज़दूर वर्ग के लिए सबसे बुरी बातों में से एक शायद यह है कि मई दिवस को आज एक अनुष्ठान बना दिया गया है … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: जिस देश का प्रधानमंत्री स्वयं स्वीकार करे की देश की 7० प्रतिशत जनता 20 या 20 रूपए से कम पर गुज़ारा कर … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: चुनावी राजनीति के मायाजाल से बाहर आओ! नये मज़दूर इन्कलाब की अलख जगाओ!! देशभर में लोकसभा चुनाव के लिए … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: विशेष सम्पादकीय (बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995) आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बेह … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: उपरोक्त संक्षिप्त चर्चा के आलोक में मज़दूर साथियों के लिए यह समझना कठिन नहीं होना चाहिए कि मई दिवस क … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: चुनाव? लुटेरों के गिरोह जुटने लगे हैं! जोड़-तोड़, झूठ-फरेब, धार्मिक उन्माद, नफरत, रक्तपात, भ्रष्टाचार … more →