दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कविवर रहीम कहते हैं रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय मनु … more →
rina56 wrote 7 months ago: सागर के इस पार सोच रही हूँ,कहाँ है भिन्नता यह ही है तकरार जाना तो है सबको एक जगह न कर भाई इंकार येही … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 10 months ago: राजा भर्तृहरि ने बतौर कवि के शतकत्रयम् की रचना की थी, जिसके तीन खंड हैं: नीतिशतकम्, शृंगारशतकम् एवं … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: इंडिया बनाम भारत की हफ्तों पहले (ब्लॉग पोस्टः अक्टूबर ६) आरंभ की गयी चर्चा अधूरी छूट गयी थी । उन पोस … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रिमझिम रिमझिम वर्षा आई, देखो बरखा बाहर आई, हम भीगे तुम भीगे, भीग गया जग सारा, छोटी छोटी बूंदों मे, ब … more →