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Blogs about: संसार

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रहीम दास के दोहे: पशु अपना हित करने वाला गुड़ कभी नहीं खाते

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कविवर रहीम कहते हैं रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय मनु … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, rahim, bharat, सन्देश, दोहे

rina562 comments

rina56 wrote 7 months ago: सागर के इस पार सोच रही हूँ,कहाँ है भिन्नता यह ही है तकरार जाना तो है सबको एक जगह न कर भाई इंकार येही … more →

Tags: Uncategorized

‘लोकः आचरति अहितम् ’ - भर्तृहरिकृत वैराग्यशतकम् से

योगेन्द्र जोशी wrote 10 months ago: राजा भर्तृहरि ने बतौर कवि के शतकत्रयम् की रचना की थी, जिसके तीन खंड हैं: नीतिशतकम्, शृंगारशतकम् एवं … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, नीतिशतक, भर्तृहरि, लोक, वैराग्यशतक, सत्कर्म

इंडिया बनाम भारत (शेष): क्या है इंडिया?

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: इंडिया बनाम भारत की हफ्तों पहले (ब्लॉग पोस्टः अक्टूबर ६) आरंभ की गयी चर्चा अधूरी छूट गयी थी । उन पोस … more →

Tags: इंडिया, देश, भारत, India, हिन्दुस्तान, समाज, परंपरा, पश्चिमीकरण, मान्यता

रिमझिम रिमझिम वर्षा आई...

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रिमझिम रिमझिम वर्षा आई, देखो बरखा बाहर आई, हम भीगे तुम भीगे, भीग गया जग सारा, छोटी छोटी बूंदों मे, ब … more →

Tags: अमरजीत सिंह, दिल, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, प्यार, रिमझिम


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