Blogs about: संस्कार

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श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

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विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

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भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →

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भारत के शिक्षित लोगों का बौद्धिक अंतर्द्वंद्व -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरो … more →

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पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर - हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →

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उपेक्षासन सीख लो तो तनाव नहीं रहेगा-व्यंग्य 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: हम कपड़े क्यों पहनते हैं? इसके चार जवाब हो सकते हैं 1.सभी कपड़े पहनकर घूमते हैं। 2.हम बिना कपड़े पहन … more →

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भर्तृहरि शतक:घमंडी अमीरों का मुहँ क्यों ताकते हो संदेश: अहंकारी धनवानों के तरफ़ क्यों देखते हो?

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →

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विदुर नीति:गलत तरीके से प्राप्त धन का दोष छिपता नहीं

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: १. अधर्म से प्राप्त हुए धन के द्वारा जो दोष छिपाया जाता है वह तो छिपता नहीं, उससे भिन्न और नया दोष प … more →

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चुंबन का स्वाद न मीठा होता है न नमकीन-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: सिनेमा या टीवी के पर्दे पर चुंबन का दृश्य देखकर लोगों के मन में हलचल पैदा होती है। अगर ऐसे में कहीं … more →

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पञ्चतन्त्र नीतिवचन: आसन्नमेव नृपतिर्भजते ...

योगेन्द्र wrote 8 months ago: पञ्चतन्त्र की कथाएं सुविख्यात हैं । इसकी अधिकतर कथाओं में कथाकार विष्णुदत्त शर्मा ने पशुपात्रों को श … more →

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मनुस्मृतिः भोग विलासी मित्र का त्याग कर देना चाहिये

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: आकीर्ण मण्डलं सव्र्वे मित्रैररिभिरेव च सर्वः स्वार्थपरो लोकःकुतो मध्यस्थता क्वचित् सारा विश्व शत्रु … more →

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संत कबीर वाणी दूसरे से उम्मीद करने पर होता है अपमान

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: आस आस घर घर फिरै, सहै दुखारी चोट कहैं कबीर भरमत फिरै,ज्यों चैसर की गोट संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं … more →

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भृतहरि शतकः बड़े लोगों से क्यों आशा करते हो ?

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →

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संत कबीर वाणीः किसी काम के नहीं हों तो ऊंचे आदमी होने से क्या लाभ1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांहि जैसे फूल उजाड़ को, मिथ्या हो झड़ जांहि संत शिरोमणि कबीरदास … more →

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संत कबीर वाणीःदिल में छल रहे तो भक्ति से कोई फायदा नहीं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हरि गुन गावे हरषि के, हिरदय कपट न जाय आपन तो समुझै नहीं, औरहि ज्ञान सुनाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत … more →

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चाणक्य नीतिः कौन ऐसा व्यक्ति है जिसके कुल में दोष नहीं है1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: 1.आज के युग में अर्थ की प्रधानता है और धन संचय प्रमुख आधार है। धन संचय हर मनुष्य के लिये आवश्यक है … more →

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आम पाठक की प्रतिक्रिया की बन सकती है अंतर्जाल लेखकों की प्रेरणा-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: इस सप्ताह मैंने कोई ऐसा पाठ या रचना नहीं लिखी जिसकी चर्चा की जा सके। वजह यह रही कि बरसात के मौसम में … more →

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कबीर साहित्य के पाठ की पाठक संख्या एक हजार के पार1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे इस ब्लाग/पत्रिका पर संत शिरोमणि कबीरदास के दोहों वाला एक पाठ आज एक हजार की पाठक संख्या पार गया। … more →

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कभी किसी का कड़वा सच उसके सामने नहीं कहना चाहिए-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सच बहुत कड़वा होता है और अगर आप किसी के बारे में कोई विचार अपने मस्तिष्क में  हैं और आपको लगता है क … more →

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