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Blogs about: संस्कार

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बुढ़ापे में कुछ नहीं सीख सकते-हिन्दू अध्यात्मिक संदेश (In old age can not learn anything - Hindu spiritual message)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— यावत्स्वस्थमिदं शरीरमरुजं याव … more →

Tags: writer, aritile in hindi, समाज, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web bhaskar, web jagran, web panjab kesri

विदुर दर्शन-सात्विक कार्य सिद्ध न हो भी चिंता नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मिथ्यापेतानि कर्माण सिध्येवुर्यानि भारत। अनुपायवुक्तानि मा स्म तेष मनः कृथाः।। हिंदी में भावार्थ-मिथ … more →

Tags: हिन्दी, inglish, संपादकीय, आध्यात्म, India, bhaarat, आलेख, हिंदी साहित्य, Internet

चाणक्य नीति-कुविचारी नारी से तो कोई साथ न हो अच्छा (chankya niti-kuvichari nari ka sath

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, चिन्तन, दीपक भारतदीप, धर्म, शब्द, हिंदी पत्रिका, हिन्दी

विदुर नीतिः ख़ुद की मूल प्रवृत्ति के विरुद्ध कार्य न करें (mool pravrutti aur kam)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

Tags: Hindi knowledge, Hindi Darshan, hindi megzine, hindi shabd, hindi samachar, hindi bhasha, hindi internet, Hindi Blogging, Deepak bharatdeep

श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

Tags: आलेख, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Deepak bapu

विदुर नीति-कम ताकत के होते गुस्सा करना तकलीफदेह

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →

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भारत के शिक्षित लोगों का बौद्धिक अंतर्द्वंद्व -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरोध … more →

Tags: आलेख, कथा साहित्य, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हिंदी, हिंदी कविता, हिंदी पत्रिका, हिंदी साहित्य

पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर - हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard

उपेक्षासन सीख लो तो तनाव नहीं रहेगा-व्यंग्य 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हम कपड़े क्यों पहनते हैं? इसके चार जवाब हो सकते हैं 1.सभी कपड़े पहनकर घूमते हैं। 2.हम बिना कपड़े पहन … more →

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भर्तृहरि शतक:घमंडी अमीरों का मुहँ क्यों ताकते हो संदेश: अहंकारी धनवानों के तरफ़ क्यों देखते हो?

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →

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विदुर नीति:गलत तरीके से प्राप्त धन का दोष छिपता नहीं

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: १. अधर्म से प्राप्त हुए धन के द्वारा जो दोष छिपाया जाता है वह तो छिपता नहीं, उससे भिन्न और नया दोष प … more →

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चुंबन का स्वाद न मीठा होता है न नमकीन-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सिनेमा या टीवी के पर्दे पर चुंबन का दृश्य देखकर लोगों के मन में हलचल पैदा होती है। अगर ऐसे में कहीं … more →

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पञ्चतन्त्र नीतिवचन: आसन्नमेव नृपतिर्भजते ...

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: पञ्चतन्त्र की कथाएं सुविख्यात हैं । इसकी अधिकतर कथाओं में कथाकार विष्णुदत्त शर्मा ने पशुपात्रों को श … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, पञ्चतन्त्र, सूक्ति, चाटुकार, विष्णुदत्त शर्मा, PanchaTantra

मनुस्मृतिः भोग विलासी मित्र का त्याग कर देना चाहिये

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आकीर्ण मण्डलं सव्र्वे मित्रैररिभिरेव च सर्वः स्वार्थपरो लोकःकुतो मध्यस्थता क्वचित् सारा विश्व शत्रु … more →

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संत कबीर वाणी दूसरे से उम्मीद करने पर होता है अपमान

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आस आस घर घर फिरै, सहै दुखारी चोट कहैं कबीर भरमत फिरै,ज्यों चैसर की गोट संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं … more →

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भृतहरि शतकः बड़े लोगों से क्यों आशा करते हो ?

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यः प्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखा … more →

Tags: Blogroll, inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, Education, Blogging, web duniya, web dunia, E-patrika

संत कबीर वाणीः किसी काम के नहीं हों तो ऊंचे आदमी होने से क्या लाभ1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांहि जैसे फूल उजाड़ को, मिथ्या हो झड़ जांहि संत शिरोमणि कबीरदास … more →

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संत कबीर वाणीःदिल में छल रहे तो भक्ति से कोई फायदा नहीं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हरि गुन गावे हरषि के, हिरदय कपट न जाय आपन तो समुझै नहीं, औरहि ज्ञान सुनाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत … more →

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