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Blogs about: संस्कृति

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प्रकृति और जीवन प्रशिक्षण का इतिहास2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखें : . प्रकृति और जीवन पद्धति जिस प्रकार लोग पृथ्वी पर फैलते गए उसी प्रकार पृथ् … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत, Anthropology, जीवन, पहरावा, समाज और संस्कृति

भोजन की खोज द्वारा दूसरी प्रकृति का निर्माण

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: पिछली बार हमने मानव की जैविक जरूरतों जैसे भोजन, आराम करना आदि के बारे में चर्चा की थी. अब हम इनपर एक … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत, Anthropology, दूसरी प्रकृति का निर, पहरावा, भोजन की खोज, समाज और संस्कृति

संस्कृति की विभिन्नता और मानव का विकास - अंतिम किश्त 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: इससे पहले : संस्कृति की विभिन्नता और मानव का विकास – दूसरी किश्त संस्कृति की विभिन्नता और मानव का वि … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत, Anthropology, खाना-पीना, दूसरी प्रकृति का निर, पहरावा, समाज और संस्कृति

संस्कृति की विभिन्नता और मानव का विकास - दूसरी किश्त

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: ऑडियो और प्रथम किश्त के लिए यहाँ क्लिक करें : . भोजन पकाने की विधियों में भी नवजाति संस्कृति की विशे … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत, समाज और संस्कृति, पहरावा, खाना-पीना, दूसरी प्रकृति का निर, Anthropology

संस्कृति की विभिन्नता और मानव का विकास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: यह आलेख उपरोक्त पंजाबी ऑडियो का हिंदी रूपांतरण है संस्कृति है क्या ? संस्कृति दूसरी प्रकृति है. एक व … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत, समाज और संस्कृति, पहरावा, खाना-पीना, दूसरी प्रकृति का निर

सभ्याचार दी भिन्नता अते विकास दा द्वंदात्मक भौतिकवादी नज़रीया (पंजाबी ऑडियो)

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: इस ऑडियो को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें फाइल साईज 4.34 mbs समय  38 मिनट … more →

Tags: Marxism, Audio, समाज और संस्कृति

न तो इतिहासग्रस्त, न ही इतिहास विमुख!2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, Marxism, समाज और संस्कृति, कला, साहित्य, लोकवाद

धार्मिक कट्टरपन्थ फ़ासीवाद के विरुद्ध सांस्कृतिक मोर्चे पर सही क्रान्तिकारी रणनीति अपनाओ!4 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: भगत सिंह, सर्वहारा, साम्प्रदायिकता, फासिज्म, हिन्दी नाटक, समाज और संस्कृति, वामपंथी, कला, साहित्य

कला-साहित्य-संस्कृति में "लोकवाद" और "स्वदेशीवाद" का विरोध करो!1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, विरासत, कविता, कार्ल मार्क्स

दलित-प्रश्न और स्त्री-प्रश्न पर सही रुख अपनाओ!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: समाजवाद, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, संघर्ष, Marxism, कविता, उदारीकरण, जीवन

कला-साहित्य के क्षेत्र में सामाजिक जनवादी प्रवृत्तियों का विरोध करो! 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: कविता, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत, समाजवाद, हिन्दी नाटक, संशोधनवाद, समाज और संस्कृति, वामपंथी

सांस्कृतिक मोर्चे पर व्यक्तिवाद, अराजकतावाद, उदारतावाद का विरोध करो!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, Marxism, उदारीकरण, माओ त्से तुंग

वामपन्थी" कलावाद-रूपवाद और मध्यवर्गीय लम्पटता का विरोध करो!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, कविता, इन्कलाब, crisis of capitalism, समाज और संस्कृति, कला, साहित्य

कला-साहित्य-संस्कृति के मोर्चे पर विचारधारात्मक संघर्ष

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, फासिज्म, साम्राज्यवाद, विरासत, Maoism

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट

भारत के शिक्षित लोगों का बौद्धिक अंतर्द्वंद्व -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरोध … more →

Tags: आलेख, कथा साहित्य, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, हिंदी, हिंदी कविता, हिंदी पत्रिका, हिंदी साहित्य

पैसे के साथ इश्क में भी आ सकता है मंदी का दौर - हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard

हिन्दी के वर्जित प्रदेश में...

Aditya Nigam wrote 1 year ago: [यह लेख कुछ अरसा पहले वाक् पत्रिका के लिए लिखा गया था - पुराने दोस्त सुधीश पचौरी के इसरार पर। जब यह … more →

Tags: bad ideas, Culture, Debates, Politics, अनुवाद, समाज विज्ञान, हिन्दी, हिन्दुस्तानी

रहीम संदेशः समय के अनुसार फल मिलता है और झड़ जाता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जात सदा रहै नहीं एक सौ, का रहीम पछितात? कविवर रहीम कहते हैं कि समय चक … more →

Tags: समाज, हिंदी पत्रिका, Deepak bharatdeep, hindi megzine, Hindi writing, web bhasakar, web dunia, web duniya, web nai duniya


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