एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत के लिए एक प्रस्ताव) कात्यायनी, सत्यम कहने की आवश्यकता नहीं कि जीवन के हर क्षेत्र में सर्वहारा वर्ग … more →
नया सर्वहारा पुनर्जागरण नया सर्वहारा प्रबोधनShaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्वीसलैंड यूनिवर्सटी आफ टैक्लनालाजी के प्रोफेसर कि अनुसार इस मंदी के दौर में लोगों के दाम्पत्य जीवन … more →
Aditya Nigam wrote 8 months ago: [यह लेख कुछ अरसा पहले वाक् पत्रिका के लिए लिखा गया था - पुराने दोस्त सुधीश पचौरी के इसरार पर। जब यह … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जात सदा रहै नहीं एक सौ, का रहीम पछितात? कविवर रहीम कहते हैं कि समय चक … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: ‘बिन फेरे, बने बसेरे’ को जब राज्य की वैधानिकता का प्रमाण मिलना प्रस्तावित भर हुआ है तब देश में एक न … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: 1.राजा, अग्नि, गुरु, स्त्री इनसे निकटता खतरनाक होती है। इनसे थोड़ा परे रहकर संपर्क रखना चाहिए। अग्नि … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: स्वारथ रचत रहीम सब, औगनहूं जग मांहि बड़े बड़े बैठे लखौ, पथ रथ कूबर छांहि कविवर रहीम कहते हैं कि लोग … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: 1.दूसरों के अभद्र शब्द सुनकर भी स्वयं उन्हें न कहे। क्षमा करने वाला अगर अपने क्रोध को रोककर भी बदतम … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: इस बार नव वर्ष की पूर्व संध्या पर कर्णाटक शैली की सुप्रसिद्ध वीणा वादिका श्रीमति जयंती कुमारेश को सु … more →
स्वाधीन wrote 2 years ago: कभी बचपन में स्कूल में श्रीमती सरोजिनी नायडू की एक कविता पढ़ी थी- ‘द बैंगिल सैलर्ज़‘. यह ग … more →