जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद से इतना रुसवा कर जाती हैं अँधेरी राहों-सा दिल सूना हो जाता है जब आँखों में तेरा सपना टूट जाता है ख़… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से मेरे जो पहली नज़्म निकली थी वह तेरे लिए थी सखी वह तेरे लिए थी तेरे मेरे ख़ाबों की ज़मीं पर सखी … more →
विनय wrote 1 year ago: आ री सखी चलें फिर वहीं जहाँ पहली बार मिले थे जहाँ सपनों की गलियाँ छूटी थीं हक़ीक़त के दरवाज़े खुले थे च … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल में तू नहीं तो क्या है सखी मान ले तू, हम तेरे हैं हमनशीं चाँदनी और सितारों की सरज़मीं महकती हवा औ … more →