कांकरवारे तैलंग तिलक द्विज वंदो श्रीमद लछमननंद । द्वैपथ राज सिरोमनि सुंदर भूतल प्रगटे वल्लभ चंद॥१॥ अबजु गहे विष्णुस्वामी पथ नवधा भक्ति रतन रस कंद । दरसन ही प्रसन्न होत मन प्रगटे पूरन परमानंद॥२॥ कीरत व… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: कांकरवारे तैलंग तिलक द्विज वंदो श्रीमद लछमननंद । द्वैपथ राज सिरोमनि सुंदर भूतल प्रगटे वल्लभ चंद॥१॥ अ … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: जब तें वल्लभ भूतल प्रगट भये। वदन सुधानिधि निरखत प्रभु कौ सब दूर गये॥१॥ श्री लछमन वंस उजागर सागर भक्त … more →