सिर्फ मंदिर में जाकर ही पूजा नहीं होती, सच तो यह है कि पूजा कि कोई जगह नहीं होती। इबादत नहीं है सिर्फ मस्ज़िद में जाकर सर झुकाना, एक और इबादत है परोपकार के काम में मन लगाना। गुरुद्वारे में मत्था टेकने … more →
पसंदAmarjeet Singh wrote 1 year ago: दोस्ती की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। आज तक मनोवैज्ञानिक भी इस बारे में किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पह … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: सिर्फ मंदिर में जाकर ही पूजा नहीं होती, सच तो यह है कि पूजा कि कोई जगह नहीं होती। इबादत नहीं है सिर् … more →