धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं अपने घर के… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामविनय wrote 8 months ago: आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ … more →
Amarjeet Singh wrote 10 months ago: धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ … more →
Amarjeet Singh wrote 10 months ago: आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा इतना मानूस न हो ख़िलवतेग़म से … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग, ये वफाओं का सिला देंगे तेरे शहर के लोग, क्या ख़बर थी तेरे … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: दिल में अब दर्द-ऐ-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं, जिन्दगी मेरी इबादत के सिवा कुछ भी नहीं, मैं तेरी बारग … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: धुआं बनाके फिजां में उड़ा दिया मुझको, मैं जल रहा था किसी ने बुझा दिया मुझको, खड़ा हूँ आज भी रोटी के … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह, फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह, मैंने तुझ से चाँद सितारे कब मांग … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: गम का खज़ाना तेरा भी है, मेरा भी ये नज़राना तेरा भी है, मेरा भी अपने गम को गीत बनाकर गा लेना राग पुरान … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी फिर भी तनहाईयों का शिकार आदमी सुबह से श्याम तक बोझ ढाता हुआ अपनी ही लाश प … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: जो भी बुरा भला है अल्लाह जानता है, बंदे के दिल में क्या है अल्लाह जानता है। ये फर्श-ओ-अर्श क्या है अ … more →