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Blogs about: सपने

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एक बचपन उसने जिया (बाल दिवस विशेष)2 comments

Nidhi KM wrote 1 week ago: एक कमरा सपनो  भरा, फर्श मखमली, छत सितारों भरीं, दीवारें रंगों सजीं, खिड़कियाँ फूलों रंगीं, सपने कहीं … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, छनिकाएँ, 14 November, आकाश, एक, खिड़कि, छत, छाँव

कुछ तो हो जो ख़ास हो ...

Gayatri wrote 2 months ago: कुछ तो हो जो ख़ास हो मुझमे भी कोई बात हो दिलो को जो लुभा सके ऐसा कोई अंदाज़ हो यही चाहता है हर कोई की … more →

Tags: कविता, आशाए, घर, पोएम, हिंदी

छोटे-छोटे सपने कब बड़े हो गये?2 comments

Nidhi KM wrote 4 months ago: छोटे छोटे सपने थे, पास मेरे सब अपने थे, न थी चाह, आसमान मे उड़ाने की, धरती ही मेरी अपनी थी, बड़ा सोच … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, अधूरे, आसमान, उड़ाने, दिल, धरती, राह, हिंदी कविता

मैं अब जीने लगी हूँ...2 comments

Nidhi KM wrote 5 months ago: कुतर दिए है, पंख अपने, जिनसे उँची उड़ान भारी थी, नील गगन मे, स्वच्छन्द उड़ चली थी, तोड़ दिए है, सब स … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, दिल से दिल की बात..., जीने, पंख, मैं, हिंदी कविता, Blessings, hindi kavita

किताबों वाला संदूक!5 comments

prithvi wrote 5 months ago: उस संदूक को कई दिनों से खोला नहीं था. आज सुबह सुबह पता नहीं क्‍यूं अचानक कैसे उसके पास पहुंच और कपड़ … more →

Tags: गांव- गुवाड़, अल बरूनी, अशोक रोड, इंडिया गेट, एफएम रेडियो, किताबें, खान मार्केट, जामुन, टीवी चैनल

~~ ऐसा सोचा है हमने ~~7 comments

ambuj wrote 11 months ago: फूलों का होगा एक बाग़, ऐसा सोचा था हमने, कुछ क्यारियां, कुछ पौधे, और पौधों पे होंगी कुछ कलियाँ ऐसा स … more →

Tags: कविता, Kavita, अपने, ऐसा सोचा है हमने, dream, Poem

~~ ऐसा सोचा है हमने ~~7 comments

ambuj wrote 11 months ago: फूलों का होगा एक बाग़, ऐसा सोचा था हमने, कुछ क्यारियां, कुछ पौधे, और पौधों पे होंगी कुछ कलियाँ ऐसा स … more →

Tags: कविता, Kavita, अपने, ऐसा सोचा है हमने, dream, Poem

सपने

देवब्रत सिंह wrote 11 months ago: आजकल संसार की जो स्थिति है, मैं उससे बहुत दु:खी हूँ।मेरी आँखों में आंसू आ जाते हैं जब मैं अपने बचपन … more →

Tags: Poetry, Social, कविता

सरकार की स्वप्न निद्रा 6 comments

kmuskan wrote 1 year ago: सरकार सोती रही मीठे सपने में खोई रही आंतकी धमाके करते रहे पर वो स्वप्न निद्रा से न जागी खुफिया एजेंस … more →

Tags: कुर्सी, निद्रा, मुंबई, वक्त, सरकार, स्वप्न, Blogroll, hindi, kala

सहने दे ग़म थोड़ा-थोड़ा8 comments

विनय wrote 1 year ago: सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भर … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ाब, eyes, Moment, Friendship, वफ़ा, ख़फ़ा, आँखें, इन्तिज़ार

तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं12 comments

विनय wrote 1 year ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →

Tags: मेरा गीत, चाँद, इश्क़, Love, time, Reminisce, तन्हाई, प्यार, याद

होठों पर कोई प्यास रखो...5 comments

pryas wrote 1 year ago: तुम भूल जाओ या याद रखो, कोई आयेगा इसकी आस रखो. धूप में पिघल जायेंगे सपने, जुल्फों की छाँव पास रखो. ह … more →

Tags: मेरी रचना, pryas, Naresh, धूप, हौंसलें, आसमां, प्यास, Dhoop, aaskma

तू जाके फिर ना आयी5 comments

विनय wrote 1 year ago: तू जाके फिर ना आयी मगर बार-बार आती रही तेरी याद सबने सुनी कहानी मेरी पर ना सुनी गयी मेरी फ़रियाद मैं … more →

Tags: मेरा गीत, Love, प्यार, याद, चेहरा, मोहब्बत, शाम, Search, तलाश

एक पल सुखी एक पल दुखी...2 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक पल सुखी एक पल दुखी, दो घड़ी कुछ इस तरह बीत चली, ज़िंदगी जैसे मुझसे रूठ चली, एक पल अपना एक पल पराया … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, प्यार, याद, ज़िंदगी

यह टूल मुझे तो दिलचस्प लगा-आलेख It is interesting tool, I thought - Stories

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरी आदत है कि आते ही अपने ईमेल पर चिट्ठाकारों की चर्चा को अवश्य पढ़ता हूं। उसमें हमेशा अपने मतलब की … more →

Tags: Blogroll, vews, inglish, vishwas, संपादकीय, अभिव्यक्ति, Life, Bloging, Urdu

आशा ही नहीं रखते तो निराशा भी नहीं होती-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लागस्पाट के ब्लाग एक आकर्षक कूड़ेदान की तरह लगते है। उस दिन मैं अपने टेलिफोन और इंटरनेट कनेक्शन का … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, हिन्दी, Global Dashboard, संपादकीय, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य

निगाहों के सपने - चाँदनी की आवाज़3 comments

Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: सपने ये निगाहों के सच हों न हों, ज़िन्दगी मे हम करीब हों न हों । ऐ दोस्त तुझे रखेंगे सदा इस दिल में, … more →

Tags: Hindi Poetry, Kavita, Poetry, कविता, निगाहें

कविता का जन्म ही पीडा से होता है-आलेख 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिन्दी ब्लोगिंग में आने के कुछ समय बाद ही मुझे लगने लगा था कि ब्लोगरों पर भी व्यंग्य लिखना चाहिए पर … more →

Tags: संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, arebic, Bloging, Urdu, Blogging, Friends

यह अंतर्जाल है कि इन्द्रजाल-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं तो इस अंतर्जाल को एक तरह का इंद्रजाल भी मानने लगा हूँ। अपनी पोस्टों का पीछा मैं कभी नहीं करता और … more →

Tags: Public Blog, संपादकीय, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, arebic, Urdu, Education, online jurnalism


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