सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भरा-भरा सपने सारे मेरे टूटे जो साथी तुम मुझसे रूठे मरना गर मेरा वफ़ा हो तो मेरी जान क्यों ख़फ़ा हो आना त… more →
तख़लीक़-ए-नज़रprithvi wrote 5 days ago: उस संदूक को कई दिनों से खोला नहीं था. आज सुबह सुबह पता नहीं क्यूं अचानक कैसे उसके पास पहुंच और कपड … more →
ambuj wrote 6 months ago: फूलों का होगा एक बाग़, ऐसा सोचा था हमने, कुछ क्यारियां, कुछ पौधे, और पौधों पे होंगी कुछ कलियाँ ऐसा … more →
ambuj wrote 6 months ago: फूलों का होगा एक बाग़, ऐसा सोचा था हमने, कुछ क्यारियां, कुछ पौधे, और पौधों पे होंगी कुछ कलियाँ ऐसा … more →
देवब्रत सिंह wrote 6 months ago: आजकल संसार की जो स्थिति है, मैं उससे बहुत दु:खी हूँ।मेरी आँखों में आंसू आ जाते हैं जब मैं अपने बचपन … more →
kmuskan wrote 7 months ago: सरकार सोती रही मीठे सपने में खोई रही आंतकी धमाके करते रहे पर वो स्वप्न निद्रा से न जागी खुफिया एजें … more →
विनय wrote 7 months ago: सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भर … more →
विनय wrote 7 months ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →
pryas wrote 9 months ago: तुम भूल जाओ या याद रखो, कोई आयेगा इसकी आस रखो. धूप में पिघल जायेंगे सपने, जुल्फों की छाँव पास रखो. ह … more →
विनय wrote 10 months ago: तू जाके फिर ना आयी मगर बार-बार आती रही तेरी याद सबने सुनी कहानी मेरी पर ना सुनी गयी मेरी फ़रियाद मैं … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक पल सुखी एक पल दुखी, दो घड़ी कुछ इस तरह बीत चली, ज़िंदगी जैसे मुझसे रूठ चली, एक पल अपना एक पल पराया … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरी आदत है कि आते ही अपने ईमेल पर चिट्ठाकारों की चर्चा को अवश्य पढ़ता हूं। उसमें हमेशा अपने मतलब क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लागस्पाट के ब्लाग एक आकर्षक कूड़ेदान की तरह लगते है। उस दिन मैं अपने टेलिफोन और इंटरनेट कनेक्शन का … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: सपने ये निगाहों के सच हों न हों, ज़िन्दगी मे हम करीब हों न हों । ऐ दोस्त तुझे रखेंगे सदा इस दिल में, … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिन्दी ब्लोगिंग में आने के कुछ समय बाद ही मुझे लगने लगा था कि ब्लोगरों पर भी व्यंग्य लिखना चाहिए पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं तो इस अंतर्जाल को एक तरह का इंद्रजाल भी मानने लगा हूँ। अपनी पोस्टों का पीछा मैं कभी नहीं करता … more →
विनय wrote 1 year ago: प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है उड़ जाये होश खो जाये दिल कुछ ऐसा काम कर जाता है मेरे सपनों में कोई आने … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल की लगी दिल को दिल से लगी जब लगी यह आग फिर न बुझी यह दिल की लगी है दिल से लगी है जब यह लगी है फिर … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं कुछ कहता हूँ दिल कुछ कहता है मेरे ख़ाबों में न जाने कौन रहता है आया नहीं कभी वह यहाँ पर फिर भी म … more →
विनय wrote 1 year ago: थकने लगी है मोहब्बत की शाम सफ़र के राही को न मिला है मक़ाम बुझने लगी है मोहब्बत की रोशनी रात का राही ह … more →