sushilgirdher wrote 1 year ago: एक ही सफर में थक कर रुका हूं पूरे तेंतीस पडावों पर…..। उतावलेपन में कहीं भी ठहर कर नहीं देखा क … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर, मंजिल का है पता मुझे, रास्ते का भी पता मुझे, पहुच जाऊंगा वक्त पर, ह … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: माना ये जग है सफर चार दिन का हम हैं मुसाफिर ये मेला छूटेगा जब होगा धमाका मौत छीन लेगी खाली हाथ जाते … more →