मनुष्य हमेशा से अपने पूर्वजों को मुर्ख समझता आया है और वह कभी यह बात मान नहीं सकता कि आदि(!!) मानव ने ऐसे कार्य कर रखे हों जिन्हे करना उसके बूते से बाहर हो (कयी उदाहरण हैं – बाद में)। आज के वेज्… more →
दिल और दिमाग सेGirijesh Rao wrote 1 month ago: कड़वी ‘करी’ (भाग – 1) से आगे . . . माइग्रेशन के तार सभ्यता के विकास से जुड़े हुए … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: ‘बिन फेरे, बने बसेरे’ को जब राज्य की वैधानिकता का प्रमाण मिलना प्रस्तावित भर हुआ है तब देश में एक न … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हर आदमी चाहता है कि उसे काम के बोझ से छुटकारा मिले, वह थोड़ा निश्चिंत रहे। निश्चिंतता को लेकर भी हर … more →
lahoti wrote 2 years ago: मनुष्य हमेशा से अपने पूर्वजों को मुर्ख समझता आया है और वह कभी यह बात मान नहीं सकता कि आदि(!!) मानव न … more →