तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर को मैं झांका करता हूं चोरी-चोरी, चूपके-चूपके । मेरे होठों पर कई दिनों से तितली बैठने नहीं आयी । मेर… more →
विजयकुमार दवे / Vijaykumar Daveरविकुल wrote 1 week ago: ढूंढता हूँ खुशियाँ जमाने भर के लिये ! कुछ तो समाँ कर लूं अपने घर के लिये !! मुफ़लिसी से भी मै आराम पा … more →
vijaykumardave wrote 1 year ago: तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर … more →
vijaykumardave wrote 1 year ago: कभी कस्ती, कभी तूफ़ां, कभी लहरें समंदर में; कई यादें, कई आंसू, कई चहरे समंदर में. वहां था पानी ही पा … more →