वो कुछ लोग है, कुछ यादें है वो कुछ लमहें है, कुछ साल है। इस दिन, हर साल यहीं हमारी अकेले में बातचीत है।… more →
ठेले पे हिमालयरवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 week ago: एक ऐसे समय में (a poem by ravi kumar, rawatbhata) एक ऐसे समय में जब काला सूरज ड़ूबता नहीं दिख रहा है … more →
Gayatri wrote 3 months ago: प्रिय मित्रो , यह ब्लॉग इंड़ीब्लागेर पर सर्वशेषठ लघु कथा श्रेणी प्रतियोगिता मे नामांकित हुआ है. अगर … more →
Nishant wrote 5 months ago: बेंजामिन फ्रेंकलिन की किताबों की दुकान थी. एक दिन उनकी दुकान पर एक ग्राहक आया. कुछ किताबें देखने के … more →
Gayatri wrote 6 months ago: “कौन है ?!! ” मंजली ने झल्लाते ही दरवाज़ा खोला. दोपहर के ३ बज रहे थे. न अम्मा जी को इस … more →