Blogs about: समाजवाद

Featured Blog

जब औजार क्रांति की माँग करते हैं 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय जी के आलेख  उद्यम और श्रम की इन टिप्पणियों को  देखें ; अभिषेक ओझा said… … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, उदारीकरण, क्रांति, पूंजीवादी संकट, साम्राज्यवाद, पूँजी, मजदूर

मैं कार्ल मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत की इतनी सरल प्रस्तुति सुन रही थी...2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: जैक लंडन का उपन्यास - देखें : \’आयरन हील\’ और अतिरिक्त मूल्य का नियम सपने का गणित अर् … more →

Tags: कम्युनिस्ट, सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, पूँजी

दलित-प्रश्न और स्त्री-प्रश्न पर सही रुख अपनाओ!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, संघर्ष, Marxism, कविता, उदारीकरण, जीवन, वर्ग चेतना

कला-साहित्य के क्षेत्र में सामाजिक जनवादी प्रवृत्तियों का विरोध करो! 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, हिन्दी नाटक, विरासत, कविता, संशोधनवाद, समाज और संस्कृति, साहित्य, संस्कृति

कला-साहित्य-संस्कृति के मोर्चे पर विचारधारात्मक संघर्ष

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, फासिज्म, मार्क्सवाद, विरासत, सर्वहारा, साम्राज्यवाद, Maoism, Marxism

आज के किसान का चरित्र - हमारी पहुँच - कुछ और स्पष्टता

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर … की टिप्पणियों के प्र … more →

Tags: क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, Communist, वर्ग चेतना, इन्कलाब, क्रांतिकारी, जनवादी

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद

कांग्रेस की जीत…अफलातून और सुरेश चिपलूनकर… कुछ विशेष टिप्पणियों का सामान्य जवाब2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखे : “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते … more →

Tags: आह्वान, उदारीकरण, कम्युनिस्ट, दायित्वबोध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, प्रतिबद्ध, मार्क्सवाद

मुझसे पहली सी मुहब्ब्त. . अंतिम भाग

Girijesh Rao wrote 1 month ago: नज्म बहुत सरल सी दिखती है, प्रेमी प्रेमिका से कह रहा है कि तुम अभी भी सुन्दर हो लेकिन जमाने में इतने … more →

Tags: कविता, कम्युनिस्ट, दुख, द्वैत, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, बौद्ध, विशिष्टाद्वैत, सूफी

चीनी विशेषता वाले ''समाजवाद'' में मज़दूरों के स्वास्थ्य की दुर्गति

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: इस साईट पर फ़िलहाल नया प्रकाशन बंद कर दिया गया है क्योंकि ‘नई समाजवादी क्रांति का उद्घोषक … more →

Tags: आंदोलन, क्रांति, बिगुल, मजदूर, मध्यवर्ग का ऊपरी तबक, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, सर्वहारा, नवउदारवादी दौर

कार्ल मार्क्‍स के जन्मदिन (5 मई) के अवसर पर 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: कार्ल मार्क्‍स फ्रेडरिक एंगेल्स विज्ञान के इतिहास में मार्क्‍स ने जिन महत्त्वपूर्ण बातों का पता लग … more →

Tags: बिगुल, क्रांति, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, विरासत

कुछ ज्यादा ही लाल... कुछ ज्यादा ही अन्तरराष्ट्रीय 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: (बिगुल के स्वरूप पर आत्माराम का पत्र) (जुलाई-अगस्त 1996) कुछ ज्यादा ही लाल… कुछ ज्यादा ही अन … more →

Tags: आंदोलन, आह्वान, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद

एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: विशेष सम्पादकीय (बिगुल प्रवेशांक, अप्रैल 1995) आज एक नये क्रान्तिकारी मज़दूर अख़बार की ज़रूरत है। बे … more →

Tags: आंदोलन, आह्वान, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद

जनता की मुक्ति का रास्ता 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: इलेक्शन नहीं ! इन्कलाब ! मेहनतकश भाइयो और बहनों! नौजवान साथियों! 15वीं लोकसभा का चुनाव चल रहा है! ए … more →

Tags: आह्वान, क्रांति, ललकार, सर्वहारा, मजदूरों का जीवन, मजदूरों के हक़, वर्ग दृष्टिकोण, Delhi-where live 40 lacs of peaple in jhuggi jhompadi, पूँजीपति वर्ग के वफा

नींद से जागो

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा … more →

Tags: आह्वान, क्रांति, भगत सिंह, मजदूर, ललकार, सर्वहारा, हिन्दी साहित्य, शिक्षा, शोषण-उत्पीड़न

दर्शन के प्रश्नों पर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: वार्ता विशेष माओ त्से-तुङ 18 अगस्त, 1964 यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अपने कुछ वरिष्ठ कामरेडों के … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, फासिज्म, साम्राज्यवाद

नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक-2

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: निकट अतीत की पृष्ठभूमि : नक्सलबाड़ी-पूर्व दो दशकों के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन नक्सलबाड़ी में … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, उदारीकरण, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद

नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक-1

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: एक सिंहावलोकन -दीपायन बोस कुछ चीज़ें धकेल दी गयी हैं अँधेरे में उन्हें बाहर लाना है, जड़ों तक जाना ह … more →

Tags: आंदोलन, आतंकवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित ‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-8. पूंजीवाद का क्रांतिकारी चरित्र व 9. पुरे विश्व में पूंजीवाद का विस्तार

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: 8. पूंजीवाद का क्रांतिकारी चरित्र “जब तक हस्तशिल्प और मैन्युफैक्चर सामाजिक उत्पादन के सामान् … more →

Tags: क्रांति, पुस्तकें, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “समाजवाद”:
Technorati Del.icio.us IceRocket