हम बहुत कुछ कहना चाहते है | रोज हमारे भीतर नई-नई बातें जन्म लेती रहती है | कई बाते ऐसी भी होती है जिन्हें हम किससे कहे, हमे पता नही होता, फिर भी हम उन्हें वयक्त करने की इच्छा रखते है | सोची गई अधिकतर … more →
उलटवांसीत्रिपुरारि कुमार शर्मा wrote 3 months ago: झुलस रहा है मेरे जिस्म का कोना-कोना रूह को आग लग गई जैसे कुछ दिनों से दिन-रात मेरी आंखों में कोई तकल … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हम बहुत कुछ कहना चाहते है | रोज हमारे भीतर नई-नई बातें जन्म लेती रहती है | कई बाते ऐसी भी होती है जि … more →