हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो खलनायक कहलाता संस्कृत हो या हिंदी या हो अंग्रेजी भाव से शब्द पहचाना जाता है ताव से अभद्र हो जाता बोलते… more →
*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: प्रसिद्ध साहित्यकार श्री नरेंद्र कोहली ने भारत के अंग्रेजी लेखकों को विदेशी लेखकों के साथ ही भारत के … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो खलन … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: दनदनाता आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज मिल गया तुम्हारे हिट होने का मंतर अपने फ्लाप होने का दर्द … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: घर भरा है समंदर की तरह दुनियां भर की चीजों से नहीं है घर मे पांव रखने की जगह फिर भी इंसान बेचैन है … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मिला सम्मान उसे नकारुं कैसे? हार पहनाया मुझे, हार उतारुं कैसे? हाय! क्षणभंगुर इन फूलों का जीवन कुम् … more →