जो दिल से जाता नहीं है तू वह गीत है जो दिल में आकर बसा था तू वह मीत है साँसों की सरगम बस तुम ही तुम लफ़्ज़ों में जब हम बस तुम ही तुम कहना कितना मुश्किल था यह समझा न सके अपने दिल की बात हम तुम्हें बता न … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जो दिल से जाता नहीं है तू वह गीत है जो दिल में आकर बसा था तू वह मीत है साँसों की सरगम बस तुम ही तुम … more →