ताउम्र मैं उसका नाम करता रहा ! पर वो मुझको बदनाम करता रहा !! इक अर्सा बीत गया मैंने सहर नहीं देखी, मेरी हर सुबह को वो शाम करता रहा ! उसके सुकुं के लिये मैं जागा रातभर, वो मेरी नींदें मगर हराम करता रहा… more →
दिल की ज़मीं पररविकुल wrote 1 week ago: ताउम्र मैं उसका नाम करता रहा ! पर वो मुझको बदनाम करता रहा !! इक अर्सा बीत गया मैंने सहर नहीं देखी, म … more →
विनय wrote 1 year ago: आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है कल तक जिसके लिए दिल दिवाना लगता है निगाहों में हैं सारे अंदाज़ आज … more →
विनय wrote 1 year ago: इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं दीजिए अगर आपको इल्ज़ाम देने हैं और कौन दूसरा सितम-परस्त होगा … more →