[गांधी जयन्ती को बीते कल दो ही दिन हुए थे । सलीम मिले तो चार पंक्तियां सुनाईं । मैंने कहा लिख दीजिए तो लिखते - लिखते चार पंक्तियां और जुड़ गयीं । कवि और शायर के अलावा सलीम और मैं राजनैतिक साथी भी हैं। … more →
यही है वह जगहअफ़लातून wrote 2 months ago: [गांधी जयन्ती को बीते कल दो ही दिन हुए थे । सलीम मिले तो चार पंक्तियां सुनाईं । मैंने कहा लिख दीजिए … more →