तुमने दिल की बात कह दी, आज ये अच्छा हुआ, हम तुम्हें अपना समझते थे, बढा धोखा हुआ, जब भी हमने कुछ कहा, उसका असर उल्टा हुआ, आप शायद भूलते है, बारहा ऎसा हुआ, आपकी आंखों में ये आंसू कहाँ से आ गये, हम तो दि… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामरविकुल wrote 5 months ago: ताउम्र मैं उसका नाम करता रहा ! पर वो मुझको बदनाम करता रहा !! इक अर्सा बीत गया मैंने सहर नहीं देखी, म … more →
विनय wrote 8 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों उसे दिनो-दोपहर ढूँढ … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चले गये तो सारा शहर खामोश है कैसा तन्हा है समाँ ताज़ीर-ए-खामोशी … more →
विनय wrote 1 year ago: जबीने-माह पर गेसू की लहर याद आती है वह गुलाबी ख़ुशरंग शामो-सहर याद आती है जिसने हमें ज़िन्दगी का दीवा … more →
विनय wrote 1 year ago: महफ़िले-उश्शाक़ में आशिक़ हम-सा न पाओगे बेकार की बातें हैं सभी दिल को कब तक जलाओगे सहर में शुआ शाम को म … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तुमने दिल की बात कह दी, आज ये अच्छा हुआ, हम तुम्हें अपना समझते थे, बढा धोखा हुआ, जब भी हमने कुछ कहा, … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरे बारें में जब सोचा नहीं था, मैं तन्हा था मगर इतना नहीं था, तेरी तस्वीर से करता था बातें, मेरे कम … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मुझे होश नहीं, मुझे होश नहीं, कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं, रात के साथ गयी बात , मुझे होश नही … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: चराग-ए-इश्क, जलाने की रात आयी है, किसी को अपना बनाने की रात आयी है, वो आज आये है महफ़िल में चांदनी ले … more →
विनय wrote 2 years ago: तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले तेरे लबों को मीठी-मीठी हँसी मिले हर दिन तुम्हें बहार का दिन हो कभी न … more →
विनय wrote 2 years ago: ख़ुदाया1 कभी करम मुझ पर भी सुम्बुल2 की थोड़ी मेहर इधर भी प्यार क्या है नहीं जानता मैं मगर सिखा दे मु … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो, मेरी तरह तुम भी झूठे हो, इक टहनी पर चाँद टिका था, मैंने ये समझा तुम बैठे … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरे आने की जब ख़बर महके, तेरे खुश्बू से सारा घर महके, शाम महके तेरे तसव्वुर से, शाम के बाद फिर सहर … more →
विनय wrote 2 years ago: तुमसे चाहत है तुमसे इबादत है मुझे इश्क़ है तुमसे … तुमको देखा तो जाना प्यार क्या है ज़िन्दगी क्य … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या खिताब है, कहीं एक हसीं सा ख्वाब है, कही जान-लेवा अज़ाब है … more →