वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है बन के लकीर हर इक, हाथों में आ बसा है वो मि… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 7 months ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है ब … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: खुशबू कोई भटकती हुई साँसों में चली आती … more →