अरी तुम कोन हो री बन में फूलवा बीनन हारी। रतन जटित हो बन्यो बगीचा फूल रही फुलवारी॥१॥ कृष्णचंद बनवारी आये मुख क्यों न बोलत सुकुमारी। तुम तो नंद महर के ढोटा हम वृषभान दुलारी॥२॥ या बन में हम सदा बसत हैं … more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: अरी तुम कोन हो री बन में फूलवा बीनन हारी। रतन जटित हो बन्यो बगीचा फूल रही फुलवारी॥१॥ कृष्णचंद बनवारी … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: राधा प्यारी कह्यो सखिन सों सांझी धरोरी माई। बिटियां बहुत अहीरन की मिल गई जहां फूलन अथांई॥१॥ यह बात ज … more →