तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा यह मौसम तो इक रोज़ आना ही था इसे क्या कहूँ, क्या प्यार का नाम दूँ तू अगर मिले मुझे तेरा हाथ थाम लूँ … more →
तख़लीक़-ए-नज़रK.VERMA wrote 2 months ago: अनजाने में छू गया था हाथ तेरा , पल को लगा मिल गया , तेरा । दिल ही तो है इसका क्या करें , न मिलो तो ह … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: तुमसे ज़्यादा और ज़्यादा पाने की और तुम्हे देने ख़्वाहिश है तुम्हारी बाहों मे जीने और मरने की ख़्वाह … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा … more →
विनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →