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Blogs about: साम्राज्यवाद

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गोरखपुर और गुडगाँव के मजदूरों का दमन और बुद्धिजीवी वर्ग की चुप्पी 4 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: एक तरफ तो उत्तर प्रदेश की सरकार ‘सर्वजन हिताय’ होने का दावा करती है लेकिन दूसरी और इस सर … more →

Tags: आंदोलन, आतंकवाद, आह्वान, उदारीकरण, कम्युनिस्ट, क्रांति, दायित्वबोध, पूंजीवादी संकट, ललकार

होन्डुरस की घटनाओं ने खोली बुर्जुआ लोकतंत्र की पोल

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: एक करोड़पति जमींदार राष्ट्रपति जिसका जुर्म था कि उसने अपने देश को अमेरिकन पक्षीय खेमें से निकाल लिया … more →

Tags: आंदोलन, क्रांति, पूंजीवादी संकट, बुर्जुआ लोकतंत्र, पुलिस दमन, प्रतिरोध, होन्डुरस, Honduras

आज शहीदे-आजम का 102वां जन्मदिन है 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम ! भगत सिंह की बात सुनों, नई क्रांति की राह चलो ! मेहनतकश ब … more →

Tags: भगत सिंह, क्रांति, आह्वान, युद्ध, काले कानून, मजदूर वर्ग की विरासत, वर्ग चेतना, इन्कलाब, आज़ादी

चुनाव या कोई अन्य इंकलाबी विकल्प 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: इस ऑडियो द्वारा शहीद भगत सिंह विचार मंच ने भारत में होने वाले निरर्थक संसदीय ओर अन्य चुनावों के बारे … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, वर्ग चेतना, इन्कलाब, संसदीय, संशोधनवाद, नक्सलबाड़ी

प्रथम अरविन्द स्मृति संगोष्ठी कार्यक्रम

saathisukhdev wrote 4 months ago: (24 जुलाई, 2009) विषय भूमण्डलीकरण के दौर में श्रम कानून और मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध  के नये रूप भूमण् … more →

Tags: दायित्वबोध, आह्वान, आंदोलन, पूंजीवादी संकट, संघर्ष, काले कानून, Marxism, उदारीकरण, आधी आबादी

जब औजार क्रांति की माँग करते हैं 3 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय जी के आलेख  उद्यम और श्रम की इन टिप्पणियों को  देखें ; अभिषेक ओझा said… … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, उदारीकरण, क्रांति, पूंजीवादी संकट, समाजवाद, अधिशेष, ट्रेड यूनियन

कला-साहित्य-संस्कृति में "लोकवाद" और "स्वदेशीवाद" का विरोध करो!1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, विरासत, कविता, कार्ल मार्क्स, Karl Marx

कला-साहित्य-संस्कृति के मोर्चे पर विचारधारात्मक संघर्ष

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, फासिज्म, मार्क्सवाद, विरासत, समाजवाद, सर्वहारा, Maoism, Marxism

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट

कांग्रेस की जीत…अफलातून और सुरेश चिपलूनकर… कुछ विशेष टिप्पणियों का सामान्य जवाब2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखे : “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते म … more →

Tags: दायित्वबोध, प्रतिबद्ध, लेनिन, आह्वान, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन

इस युग का प्रधान वैषम्य : जनतन्तर कथा (34) की हिफाजित में 10 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: “कोट, कपड़ा, आदि उपयोग-मूल्य, अर्थात पण्यों के ढांचे, दो तत्त्वों के योग होते हैं – पदार् … more →

Tags: विचारणीय : मीडिया से, प्रतिबद्ध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, Marxism, वैकल्पिक मीडिया

पाँच क्रान्तिकारी जनसंगठनों का साझा चुनावी भण्डाफोड़ अभियान

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: चुनावी राजनीति के मायाजाल से बाहर आओ! नये मज़दूर इन्कलाब की अलख जगाओ!! देशभर में लोकसभा चुनाव के लिए … more →

Tags: बिगुल, क्रांति, आह्वान, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, फासिज्म, काले कानून

प्रेम, परम्परा और विद्रोह1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: कात्यायनी बाबू बजरंगी आज एक राष्ट्रीय परिघटना बन चुका है। अहमदाबाद के इस शख्स का दावा है कि अब तक वह … more →

Tags: भगत सिंह, क्रांति, ललकार, सर्वहारा, साम्प्रदायिकता, फासिज्म, हिंदुत्व की प्रयोगश, आधी आबादी, कात्यायनी

सर्वहारा वर्ग का ऐतिहासिक विकास 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: 16. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां वर्तमान समय में ‘सर् … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स

संकटों के सिद्धांत और इतिहास के बारे में कुछ बातें1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां अंग्रेज़ मेहनतकश व … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स

डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 14. पूंजीवाद और प्रकृति पर मनुष्य की विजय सन 1848 तक प्रकृति पर मनुष्य की विजय का काम बहुत धीमी गति … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स

‘कम्युनिस्ट घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां-13

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: पूँजी का संचय पूंजीपतियों के व्यक्तिगत नियंत्रण में पूंजी का संचय दो तरीकों से होता है. सबसे पहले श् … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, Marxism, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, Karl Marx

दर्शन के प्रश्नों पर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: वार्ता विशेष माओ त्से-तुङ 18 अगस्त, 1964 यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अपने कुछ वरिष्ठ कामरेडों के सा … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, फासिज्म

नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक-2

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: निकट अतीत की पृष्ठभूमि : नक्सलबाड़ी-पूर्व दो दशकों के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन नक्सलबाड़ी में क … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद


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