एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का जब तलक साया था सर पे हुमा का मेरी शिकस्त ही तक़… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 6 months ago: एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का जब तलक … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: रोज़े - शामे - दीवाली कोई नूरे - चराग़ न … more →