ऐसी आंखें नही देखी, ऐसा काजल नही देखा, ऐसा जलवा नही देखा, ऐसा चेहरा नही देखा, जब ये दामन की हवा ने, आग जंगल में लगा दे, जब ये शहरो में जाए, रेत में फूल खिलाये, ऐसी दुनिया नही देखी, ऐसा मंजर नही देखा, … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामkmuskan wrote 1 year ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्य … more →
विनय wrote 1 year ago: यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह बदलना था तुम्हें तो मुझ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हँसते है ज़माने मैं और भी कई, दिल से हँसते पहली बार देखा है, आज मैंने उनको हँसते हुए देखा है, उनकी ह … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ऐसी आंखें नही देखी, ऐसा काजल नही देखा, ऐसा जलवा नही देखा, ऐसा चेहरा नही देखा, जब ये दामन की हवा ने, … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम? बदरा सावन बुलाये, कहाँ हो तुम? अपने हश्र तक पहुँचा ‘नज़र … more →
विनय wrote 1 year ago: यह मौसम है मस्त-मस्त यह आलम है मस्त-मस्त अम्बर पे छायी काली घटा सावन बरसे कर दे मस्त यह मौसम है मस्त … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल की लगी दिल को दिल से लगी जब लगी यह आग फिर न बुझी यह दिल की लगी है दिल से लगी है जब यह लगी है फिर … more →
विनय wrote 1 year ago: यह रंगीन फ़िज़ा बेरंग दिख रही है सावन की बदली तंग दिख रही है एक मैं सिर्फ़ मैं यहाँ बैठा रहता हूँ बैठकर … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी हम मौसम थे कभी ख़ुद मौसम था सावन की चाह में इक सावन मिला तो दूसरा गया आजकल अकेला हूँ शायिर: विनय … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए वह ख़फ़ा हुआ हम ख़त्म हुए कोसूँ क्या अपनी क़िस्मत को हमें भी कुछ नये इल्म हुए … more →