Blogs about: साहित्य कुन्ज

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मौन मुखर!*

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago:          कैसे मन की अगन बुझे राख मे शोल़े़, जलन तुझे झुलसी लपटें क्यों सह कर               मौन मुखर! … more →

Tags: गीत, मंच

कीचड़ मे कमल

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पाषाण हो चुका यह हृदय जिससे चट्टाने आपस मे टकरा  कर चूर होती बह रही नदियों मे पर अब भी कोपले खिलने क … more →

Tags: अतुकांत, साउथ एशिया टाइम्स

दिल का दर्द

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: खोईखोई उलझनो का कुछ तो राज है क्या करें दिल का दर्द लाइलाज है झांझर झमझम बजी सृष्टि का मूल तारे ग्रह … more →

Tags: तुकान्त, मंच


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