Blogs about: साहित्य

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आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, हास्य व्यंग्य

लाज ओढूं (गीत) घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 6 days ago: लाज ओढूं (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गीत, हिन्दी नेट, Geet - Ghanshyam Thakkar

सि़यों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो ग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्त राम, शब्द, सन्देश, हिन्दी, bharat, Deepak bharatdeep

चैतकी रजनी और् चंद्रमा (अछांदस) - घनश्याम ठक्कर1 comment

kalapiketan wrote 2 weeks ago: चैतकी रजनी और्  चंद्रमा अछांदस घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: अछांदस, कविता, घनश्याम ठक्कर, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग, Ghanshyam Thakkar, Hindi Literature

न तो इतिहासग्रस्त, न ही इतिहास विमुख!2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, Marxism, समाज और संस्कृति, कला, संस्कृति, लोकवाद

मैं कार्ल मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत की इतनी सरल प्रस्तुति सुन रही थी...2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: जैक लंडन का उपन्यास - देखें : \’आयरन हील\’ और अतिरिक्त मूल्य का नियम सपने का गणित अर् … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, कम्युनिस्ट, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, समाजवाद, सर्वहारा, अधिशेष, कार्ल मार्क्स

"माँ कह एक कहानी।" - मैथिलीशरण गुप्त10 comments

kalapiketan wrote 3 weeks ago: “माँ कह एक कहानी।” मैथिलीशरण गुप्त ——————— … more →

Tags: घनश्याम ठक्कर, मैथिलीशरण गुप्त, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग, Ghanshyam Thakkar, Hindi Literature, Hindi Poems

धार्मिक कट्टरपन्थ फ़ासीवाद के विरुद्ध सांस्कृतिक मोर्चे पर सही क्रान्तिकारी रणनीति अपनाओ!4 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: फासिज्म, भगत सिंह, सर्वहारा, साम्प्रदायिकता, हिन्दी नाटक, कला, मध्यवर्गीय लम्पटता, वामपन्थी, संस्कृति

कला-साहित्य-संस्कृति में "लोकवाद" और "स्वदेशीवाद" का विरोध करो!1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, विरासत, कविता, कार्ल मार्क्स

दलित-प्रश्न और स्त्री-प्रश्न पर सही रुख अपनाओ!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: समाजवाद, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, संघर्ष, Marxism, कविता, उदारीकरण, जीवन

कला-साहित्य के क्षेत्र में सामाजिक जनवादी प्रवृत्तियों का विरोध करो! 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: कविता, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, विरासत, समाजवाद, हिन्दी नाटक, वामपन्थी, संशोधनवाद, संस्कृति

सांस्कृतिक मोर्चे पर व्यक्तिवाद, अराजकतावाद, उदारतावाद का विरोध करो!

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Tags: लेनिन, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, Marxism, उदारीकरण, माओ त्से तुंग

वामपन्थी" कलावाद-रूपवाद और मध्यवर्गीय लम्पटता का विरोध करो!

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Tags: कविता, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, इन्कलाब, कला, मध्यवर्गीय लम्पटता, वामपन्थी, संस्कृति

कला-साहित्य-संस्कृति के मोर्चे पर विचारधारात्मक संघर्ष

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Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, फासिज्म, मार्क्सवाद, विरासत, समाजवाद, सर्वहारा, साम्राज्यवाद, Maoism

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: आंदोलन, उदारीकरण, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, फासिज्म, मार्क्सवाद

मरूध्यान ना बने (मुक्तक) - घनश्याम ठक्कर1 comment

kalapiketan wrote 3 weeks ago: मरूध्यान ना बने     मुक्तक   घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: कविता, गझल, घनश्याम ठक्कर, मुक्तक, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग

मरूध्यान ना बने (मुक्तक) - घनश्याम ठक्कर1 comment

kalapiketan wrote 3 weeks ago: मरूध्यान ना बने     मुक्तक   घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: कविता, गझल, घनश्याम ठक्कर, मुक्तक, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग

संत कबीर के दोहे: भक्ति और ध्यान एकांत में करें

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कबीर वाणी, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Dashboard, Deepak bapu

मुश्किल है अपना मेल प्रिये5 comments

Satish Chandra satyarthi wrote 1 month ago: डॉ. सुनील जोगी की एक बड़ी लोकप्रिय हास्य- कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ. आनंद लीजिये……… … more →

Tags: डॉ. सुनील जोगी, मुश्किल है अपना मेल प, सतीश चन्द्र सत्यार्, सुनील जोगी, Jawaharlal Nehru University, JNU, Poem, Sahitya, satish chandra satyarthi


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