इस सिक्के ने लाजमीतौर पर पाठकों का ध्यान खींचा । हमारे देश में साक्षरता की कमी और अल्प-साक्षरता के कारण जिनके हाथ यह सिक्का लगा उनमें से कइयों ने इसे डेढ़ रुपए का सिक्का माना । लावण्या जी, यह स… more →
शैशवविनय wrote 1 year ago: वो वक़्त कि वक़्त हमें सिर पे लिए फिरता था अब है कि मेरे दरवाज़े से गुज़रते हुए डरता है कारू के ख़ज़ाने म … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: इस सिक्के ने लाजमीतौर पर पाठकों का ध्यान खींचा । हमारे देश में साक्षरता की कमी और अल्प-साक्षरता … more →