मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सित … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: कितने दिन हुए कोई टूटता सितारा नहीं दे … more →