गिर जायेगा इस बरसात में घर तुम हो उधर हम हैं इधर जंगल ही जंगल है सब वीराना-सा ज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 8 months ago: गिर जायेगा इस बरसात में घर तुम हो उधर ह … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने मे … more →