ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जाने है हो न जाऊं कहीं मै मग़रूर थाम लो जो दिलों को दिलों से करता है अलग तुम ज़माने का वो इक दस्तूर थाम … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जा … more →