ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ताज भी काम संतराश का ओ नाम बादशाह का मुख़्तसर सी बात है लेकिन सबूत पेश हो आजकल मोहताज हो गया है सच गवाह… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म स … more →
विनय wrote 1 year ago: अम्बर में जब चाँद खिला उस पल से चला जानाँ एक नया सिलसिला मुहब्बत भरी वादियों में इक नया गुल खिला तुम … more →
विनय wrote 2 years ago: तह पर तह लगी है कौन उतारेगा धूल पन्नों पर से आँधियों में… मैं खड़ा रहा साथ उसके न उसने मुझको द … more →
विनय wrote 2 years ago: रोज़, यह बुझता नहीं शब, यह गलती नहीं बिन तेरे सब कुछ थम के रह गया है *दिन में रोशनी होती है, इसलिए … more →