दूर रह कर भी, कितने करीब हो तुम, आज ये जान पता हूँ, जब तेरी यादों को, सीने से लगाता हूँ, करीब रह के भी, न जान पाया तुझे, आज ये सोच कर, सिर्फ़ पछताता हूँ,… more →
मेरे दिल ने...Praful wrote 8 months ago: तीन घंटे के ऑपरेशन के बाद छड़ निकाल दी गई होली खेलने में मग्न छह साल का मेहुल छत से सीधे लोहे की छड़ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: दूर रह कर भी, कितने करीब हो तुम, आज ये जान पता हूँ, जब तेरी यादों को, सीने से लगाता हूँ, करीब रह के … more →