सुंदर चंद ठाकुर की एक कविता हिंदी में हिंदी में नहीं रहा शब्द से रोटी मांगने का रिवाज शब्द यहां भूख है दीवानगी है कैद भी और निर्वाण भी शब्द हाशिए पर लड़ाई है जो लड़ी जाती है अंतहीन युद्ध की तरह … more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 2 years ago: सुंदर चंद ठाकुर की एक कविता हिंदी में हिंदी में नहीं रहा शब्द से रोटी मांगने का रिवाज शब्द यह … more →