आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो लब्ज़ों में सन्नाटे बुन लो बिखर रहे हैं अक्स के टुकड़े टुकड़ों में ख़ामोशी चुन लो अश्क़ों से अफ़साने लिख दो कुछ अपने बेगाने लिख दो कुछ कह दो भीगी आँखों से बूँदों में ख़ामोशी चुन लो ख़्वाब… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो लब्ज़ों में सन्नाटे बुन लो बिखर रहे हैं अक्स के टुकड़े टुकड़ों में ख़ामोशी चुन लो अ … more →