हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में रह गये वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में रह गये कि अब हम कहाँ कि अब तुम कहाँ यह दीवारें कैसी बन गयीं दोन… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में … more →