अब आधा जल निश्चल, पीला, - आधा जल चंचल औ’, नीला - गीले तन पर मृदु संध्यातप सिमटा रेशम पट-सा ढीला! ऐसे सोने के साँझ प्रात, ऐसे चाँदी के दिवस रात, ले जाती बहा कहाँ गंगा जीवन के युग-क्षण – किस… more →
झोलाछाप बनारसीthemaskedcrusader wrote 11 months ago: अब आधा जल निश्चल, पीला, - आधा जल चंचल औ’, नीला - गीले तन पर मृदु संध्यातप सिमटा रेशम पट-सा ढील … more →
themaskedcrusader wrote 11 months ago: मैं नहीं चाहता चिर दुख, सुख दुख की खेल मिचौनी खोले जीवन अपना मुख! सुख-दुख के मधुर मिलन से यह जीवन हो … more →