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Blogs about: सूक्ति

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‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ इत्यादि - मनुस्मृति के वचन2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 2 months ago: ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते …’ कहते हुए समाज में स्त्रियों को सम्मान मिलना चाहिए की बात अक्सर सु … more →

Tags: नीति, प्राचीन-भारत, संस्कृत-साहित्य, Morals, मनुस्मृति, यत्र नार्यस्तु पूज्, हिंदू समाज, Hindu society, manusmriti

छिद्रेष्वनर्था बहुलीभवन्ति - संस्कृत नाट्यकृति मृच्छकटिकम् की उक्ति

योगेन्द्र जोशी wrote 5 months ago: अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब मनुष्य किसी एक विपत्ति का सामना कर रहा होता है तो और भी कई अड़चनें उ … more →

Tags: नीति, संस्कृत-साहित्य, नाटक, मृच्छकटिक, Morals, छिद्रेष्वनर्था बहुल, मृच्छकटिकम्, Mruchchhakatikam, संस्कृत नाट्यकृति

लोभः पापस्य कारणम् (हितोपदेश) - लोभ से प्रेरित होती है ठगी

योगेन्द्र जोशी wrote 5 months ago: इधर कुछ दिनों से टीवी समाचार चैनलों पर ठगी के मामलों की चर्चा सुनने को मिल रही हैं । बताया जा रहा है … more →

Tags: दर्शन, नीति, संस्कृत-साहित्य, हितोपदेश, Morals, महाभारत, लोभ, तृष्णा, Mahabharata

दूसरों की सफलता सहना सरल नहीं - चाणक्य वचन

योगेन्द्र जोशी wrote 7 months ago: इस माह की ‘सम्भाषणसंदेशः’ नामक मासिक संस्कृत पत्रिका में मुझे अधोलिखित नीतिवचन पढ़ने को मिला: दह्यमान … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, प्रतिस्पर्धा, चाणक्य, निंदा, राजनेता, सम्भाषणसंदेशः, स्वभाव

काल की महिमा - महाकाव्य महाभारत के वचन1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 8 months ago: महाकाव्य महाभारत के परिचयात्मक प्रथम अध्याय में ‘काल’ यानी समय की महिमा का वर्णन किया गया है । इस अध … more →

Tags: अध्यात्म, दर्शन, संस्कृत-साहित्य, महाभारत, प्राचीन-भारत, सृष्टि, उग्रश्रवा, काल, जीव

हितोपदेश के नीतिवचन: दो, विद्या की महत्ता

योगेन्द्र जोशी wrote 8 months ago: पिछली पोस्ट (९ मार्च २००९) में मैंने संस्कृत ग्रंथ हितोपदेश के नीतिवचनों की चर्चा आरंभ की थी । उस पो … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, विद्या, ज्ञान, धन, धर्म, योग्यता

हितोपदेश के नीतिवचन: एक, विद्या की महत्ता

योगेन्द्र जोशी wrote 8 months ago: नीतिवचनों से सुसंपन्न साहित्य संस्कृत भाषा में प्रचुरता से उपलब्ध है । रामायण, महाभारत तथा विभिन्न प … more →

Tags: नीति, संस्कृत-साहित्य, पञ्चतन्त्र, हितोपदेश, नीतिवचन, नारायण पंडित, विद्या, विष्णुशर्मा

कभी न बुढ़ाने वाली तृष्णा - नीतिवचन महाभारत से

योगेन्द्र जोशी wrote 9 months ago: महाकाव्य महाभारत के कौरव-पांडव युद्ध की समाप्ति के बाद उसके दुष्परिणामों से व्यथित युधिष्ठिर शरशय्या … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, महाभारत, भीष्म, युधिष्ठिर, अनुशासन पर्व, तृष्णा, माया, वृद्धावस्था

‘लोकः आचरति अहितम् ’ - भर्तृहरिकृत वैराग्यशतकम् से

योगेन्द्र जोशी wrote 10 months ago: राजा भर्तृहरि ने बतौर कवि के शतकत्रयम् की रचना की थी, जिसके तीन खंड हैं: नीतिशतकम्, शृंगारशतकम् एवं … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, नीतिशतक, भर्तृहरि, संसार, लोक, वैराग्यशतक, सत्कर्म

व्यंगोक्ति: न वृथा किञ्चिदाचरेत्

योगेन्द्र जोशी wrote 10 months ago: दक्षिण भारतीय नगर बेंगलुरु से ‘संस्कृतसंदेशः’ नामक एक संस्कृत पत्रिका छपती है । इसमें एक स्थाई स्तंभ … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, व्यंग, चाटुकार, चाटु, धर्मकर्म, परलोक

‘लोभः पापस्य कारणम्’ और ‘सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ति’1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 10 months ago: इधर दो-चार दिनों से ‘सत्यम’ नामक सॉफ्टवेयर कंपनी समाचार माघ्यमों का विषय बना हुआ है, किसी सार्थक उपल … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, हितोपदेश, नीतिशतक, भर्तृहरि, धनोपार्जन, नारायणपण्डित, प्रतिस्पर्धा

नववर्ष के आगमन पर मंगलकामना - सर्वे भवन्तु सुखिनः ...

योगेन्द्र जोशी wrote 10 months ago: वर्ष २००९ का आगमन हो चुका है । पिछले वर्ष सारा विश्व आर्थिक मंदी से जूझता रहा, तो अपना देश उसके साथ … more →

Tags: अध्यात्म, वैदिक भारत, संस्कृत-साहित्य, उपनिषद्, प्राचीन-भारत, ईश्वर, कल्याण, देवता, नववर्ष

लाङ्गूलचालनम् ...: नीति वचन भर्तृहरिकृत नीतिशतकम् से

योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: श्रीभर्तृहरि विरचित नीतिशतकम् में कुण्ठित एवं स्वाभिमानी व्यक्ति के बीच का अंतर कुत्ते और हाथी की पर … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, नीतिशतकम्, भर्तृहरि, व्यवहार, नीति वचन, स्वाभिमान

श्वः कार्यमद्य...यानी काल करै सो आज... (महाभारत)

योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: महाकाव्य महाभारत के शान्तिपर्व में पितामह भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को विविध उपदेश दिये जाने का विस्तृत … more →

Tags: नीति, संस्कृत-साहित्य, महाभारत, हिन्दी साहित्य, Morals, Mahabharata, कबीर, भीष्म, युधिष्ठिर

गतानुगतिको ... : लकीर का फकीर यह संसार

योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: अपने छात्रजीवन में मैंने एक नीतिश्लोक पढ़ा था जो मुझे अपनी कमजोर स्मरणशक्ति के बावजूद आज भी याद है, श … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, कथा, Morals, अंध नकल, लकीर का फकीर, व्यवहार, शिवलिंग

वनों का बाघों से संबंध - महाभारत से

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: महाभारत के अध्ययन के समय मुझे उद्योगपर्व के अंतर्गत एक रोचक श्लोक पढ़ने को मिला जिसमें वनों तथा बाघों … more →

Tags: नीति, संस्कृत-साहित्य, महाभारत, Mahabharata, उद्योगपर्व, बाघ, सह-अस्तित्व, Tiger, Coexistence

सुभाषित: कृतघ्नता वृक्षों के प्रति1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मेरे पास सुभाषितमाला नाम की एक पुस्तक है, श्री अरविंद आश्रम, पुदुच्चेरी (पूर्व में पांडिचेरी) से प्र … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, Morals, ग्वोबल वार्मिंग, Global Warming, सुभाषितमाला, Subhashitamala

पञ्चतन्त्र नीतिवचन: आसन्नमेव नृपतिर्भजते ...

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: पञ्चतन्त्र की कथाएं सुविख्यात हैं । इसकी अधिकतर कथाओं में कथाकार विष्णुदत्त शर्मा ने पशुपात्रों को श … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, पञ्चतन्त्र, चाटुकार, विष्णुदत्त शर्मा, PanchaTantra, संस्कार


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