प्राकृतिक का नियम है परिवर्तन! दिन हुआ है तो रात भी होगी। सूरज उगा है तो जरूर डूबेगा। धूप है तो अंधेरा भी होगा। यह तो प्रतिदिन होने वाले नियम हैं इसलिये दिखाई देते हैं और इनमें किसी प्रकार का परिवर्तन… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 23 hours ago: कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन को लेकर जोरदार सम्मेलन हो रहा है। इसमें गैस उत्सर्जन को लेकर अनेक तरह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: प्राकृतिक का नियम है परिवर्तन! दिन हुआ है तो रात भी होगी। सूरज उगा है तो जरूर डूबेगा। धूप है तो अंधे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शाम के समय दीपक बापू अपने घर से बाहर निकल एक निकट के उद्यान में हवा खाने पहुंचे। अंदर प्रवेश करने से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: संतोषाऽमृत-तुप्तानां यत्सुखं शान्तचेतसाम्। न च तद् धनलूब्धानामितश्चयेतश्च धावताम्।। हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस दिन एक संत को हमने पेट में अन्न पचाने का मंत्र बताते हुए सुना। वह सुबह, दोपहर और रात को भोजन करने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: दीपावली पर घर में आले में बने मंदिर से लेकर गली के नुक्कड़ तक प्रकाश पुंज सभी ने जला दिये। अंतर्मन मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जहां तक भारत की स्वयंवर परंपराओं से जुड़ी कथाओं की हमें जानकारी है तो उसके नायक नायिका तो नयी उम्र के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सारे जहां की प्यास मिटा सको तुम वह समंदर बनना. भेजे जो आकाश में पानी भरकर मेघ जहां लोग पानी को तरसे … more →
उन्मुक्त wrote 2 months ago: मैंने कुछ समय पहले बचपन में पढ़ी आर्ची कॉमिक्स के बारे में ‘हाय, यह क्या किया – मेरा दिल ही टू … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ————————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: डरते डरते आदमी डरपोक हो जाता है। उसकी यह आदत हो जाती है कि वह राह चलते हुए कोई अन्य आदमी उसकी तरफ दे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यमो वैवस्वतो देवो यस्तवैध हृदिस्थितः। तेन चेदविवादस्ते मां गंगा मा कृरून गमः।। हिंदी में भावार्थ-सभी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अजानन्दाहात्भ्यं पततु शालभे दीपदहने स मीनोऽप्यज्ञानाद्वडियुतमश्नातु पिशितम्। विजानंतोऽप्येतेवयमिह वि … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: लो आ गया हिन्दी दिवस नारे लगाने वाले जुट गये हैं। हिंदी गरीबों की भाषा है यह सच लगता है क्योंकि वह भ … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: पिता ने अपनी पूरी जिंदगी छोटी दुकान पर गुजारी और वह नहीं चाहते थे कि उनका पुत्र भी इसी तरह अपनी जिंद … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: न नटा न विटा न गायकाः न च सभ्येतरवादचंचवः। नृपमीक्षितुमत्र के वयं स्तनभारानमिता न योषितः।। हिंदी में … more →
उन्मुक्त wrote 6 months ago: किशोरावस्था में कदम रखते रखते मैंने, शायद हम सब ने, आर्ची कॉमिक्स पढ़ना शुरु कर दिया। कॉमिक्स पढ़ने … more →
उन्मुक्त wrote 6 months ago: ‘पुरुषों की ब्रीफ तो लम्बी हो सकती है पर महिलाओं की स्कर्ट ब्रीफ नहीं हो सकती। नेकटाई मर्यादित … more →
उन्मुक्त wrote 9 months ago: ‘अरे उन्मुक्त जी, क्यों बोर कर रहे हैं। हमें भी मालुम है कि आज अलबर्ट आइन्स्टीन का जन्मदिन है। … more →