रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चले गये तो सारा शहर खामोश है कैसा तन्हा है समाँ ताज़ीर-ए-खामोशी मुहीब दिल धड़कता था कभी अब मगर खामोश है उम्र भर वो साथ थे पर नहीं समझे मुझे मेरी नज़र में इल्तिमास उनक… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चले गये तो सारा शहर खामोश है कैसा तन्हा है समाँ ताज़ीर-ए-खामोशी … more →