ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्याले संग जाने वो पल कहाँ खो गए जब सावन की पहली बारिश तन और मन दोनों को भिगो जाती थी जाने वो पल… more →
कुछ िदल सेरवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 month ago: अच्छा लगता है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) अच्छा लगता है बच्चों को खिलखिलाते देखना समन्दर को … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि ———————— तारा मण् … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: धरती की रौशनी बचाने के लिये उन्होंने अपने घर और शहर में अंधेरा कर लिया फिर उजाले में कहीं वह लोग खो … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →
kmuskan wrote 9 months ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प … more →
pryas wrote 9 months ago: कुछ और लिखने का प्रयास किया है. कृपया मेरी गलतियाँ सुधारें. ~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~-~- … more →
विनय wrote 11 months ago: बड़ी उम्मीद से मैं चला था तआक़ुब-ए-इश्क़ पर और दीदार उसका मुझको ही घायल कर गया है अब सुबह का चाँद और श … more →
विनय wrote 12 months ago: जो मुझको जानते हैं ज़रा कम जानते हैं जो नहीं जानते हैं ज़रा ज़्यादा जानते हैं जो ढीठ बनके बैठा हुआ है म … more →
kmuskan wrote 1 year ago: जी भरकर जी ले इस पल को जाने फिर ये पल हो न हो हर खुशी को समेट ले अपनी बाहों में जाने फिर ये पल हो न … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: सूरज की किरण मेरे चाँद से टकराई, तन बदन मे मेरे जैसे आग लग आई, उसने ली कुछ इस तरह से अंगडाई, फूलों स … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल में दुआ दिल में पिया दिल ने चाहा दिल ने किया इश्क़ पर किसका ज़ोर है बहती हवाओं में शोर है दिल में … more →