ऐसो पूत देवकी जायो। चारों भुजा चार आयुध धरि, कंस निकंदन आयो ॥१॥ भरि भादों अधरात अष्टमी, देवकी कंत जगायो। देख्यो मुख वसुदेव कुंवर को, फूल्यो अंग न समायो॥२॥ अब ले जाहु बेगि याहि गोकुलबहोत भाँति समझायो। … more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: ऐसो पूत देवकी जायो। चारों भुजा चार आयुध धरि, कंस निकंदन आयो ॥१॥ भरि भादों अधरात अष्टमी, देवकी कंत जग … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: चिरजीयो होरी को रसिया चिरजीयो। ज्यों लो सूरज चन्द्र उगे है, तो लों ब्रज में तुम बसिया चिरजीयो ॥१॥ नि … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: शयन भोग के समय राधे जू आज बन्यो है वसंत। मानो मदन विनोद विहरत नागरी नव कंत॥१॥ मिलत सन्मुख पाटली पट म … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: मलार मठा खींच को लोंदा। जेवत नंद अरु जसुमति प्यारो जिमावत निरखत कोदा॥ माखन वरा छाछ के लीजे खीचरी मिल … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: ग्वालिन मेरी गेंद चुराई। खेलत आन परी पलका पर अंगिया मांझ दुराई॥१॥ भुज पकरत मेरी अंगिया टटोवत छुवत छं … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: देखोरि हरि भोजन खात। सहस्त्र भुजा धर इत जेमत हे दूत गोपन से करत हे बात॥१॥ ललिता कहत देख हो राधा जो त … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: अरी तुम कोन हो री बन में फूलवा बीनन हारी। रतन जटित हो बन्यो बगीचा फूल रही फुलवारी॥१॥ कृष्णचंद बनवारी … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: राधा प्यारी कह्यो सखिन सों सांझी धरोरी माई। बिटियां बहुत अहीरन की मिल गई जहां फूलन अथांई॥१॥ यह बात ज … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: मोहन केसे हो तुम दानी। सूधे रहो गहो अपनी पति तुमारे जिय की जानी॥१॥ हम गूजरि गमारि नारि हे तुम हो सार … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: व्रजमंडल आनंद भयो प्रगटे श्री मोहन लाल। ब्रज सुंदरि चलि भेंट लें हाथन कंचन थार॥१॥ जाय जुरि नंदराय के … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: रानी तेरो चिरजीयो गोपाल । बेगिबडो बढि होय विरध लट, महरि मनोहर बाल॥१॥ उपजि पर्यो यह कूंखि भाग्य बल, स … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: राखी बांधत जसोदा मैया । विविध सिंगार किये पटभूषण, पुनि पुनि लेत बलैया ॥१॥ हाथन लीये थार मुदित मन, कु … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: पवित्रा पहरत हे अनगिनती। श्री वल्लभ के सन्मुख बैठे बेटा नाती पंती॥१॥ बीरा दे मुसिक्यात जात प्रभु बात … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: पवित्रा श्री विट्ठलेश पहरावे। व्रज नरेश गिरिधरन चंद्र को निरख निरख सचु पावे॥१॥ आसपास युवतिजन ठाडी हर … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: पवित्रा पहरे को दिन आयो। केसर कुमकुम रसरंग वागो कुंदन हार बनायो॥१॥ जय जयकार होत वसुधा पर सुर मुनि मं … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: पहरे पवित्रा बैठे हिंडोरे दोऊ निरखत नेन सिराने। नव कुंज महल में राजत कोटिक काम लजाने ॥१॥ हास विलास ह … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: हों तो एक नई बात सुन आई। महरि जसोदा ढोटा जायो, आंगन बजत बधाई ॥१॥ कहिये कहा कहत नहि आवे रतन भूमि छबि … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: सोभित कर नवनीत लिए। घुटुरुन चलत रेणु तनु मंडित, मुख पर दधि को लेप किए॥१॥ चारु कपोल लोल लोचन छवि, गोर … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: देखो माई ये बडभागी मोर। जिनकी पंख को मुकुट बनत है, शिर धरें नंदकिशोर॥१॥ ये बडभागी नंद यशोदा, पुन्य क … more →