कहीं अहसास बिकते हैं, कहीं विश्वास बिकते हैं, अगर दिल टूट जाए तो, दीवाने खास बिकते हैं। कहीं मेंहदी हँसाती है, कहीं मेंहदी रुलाती है, पिया का प्यार मिल जाए , तो … more →
अनुभूति कलशramadwivedi wrote 2 months ago: कहीं अहसास बिकते हैं, कहीं विश्वास बिकते हैं, अगर दिल टूट जाए तो, दीवाने खास बिक … more →
ramadwivedi wrote 3 months ago: कविता कामिनी भी है, कविता दामिनी भी है, कविता रूठ जाए गर, दंशदायिनी भ … more →
ramadwivedi wrote 3 months ago: हर साँस दे दी तुमको, अपने न बन सके तुम, माना था तुमको हीरा, क … more →
ramadwivedi wrote 4 months ago: इंसान के दिल में गुरूर कितना? इंसान बन गया है मग़रूर कितना? चूर-चूर चाहे हो जाए … more →
ramadwivedi wrote 5 months ago: शुभ्र-धवल,कमलासना, हंसवाहिनी,माँ शारदे। सप्त सुरों की साधिका, नमो नमा … more →
ramadwivedi wrote 5 months ago: शून्य! जीवन- यात्रा का आरंभ, जन्म जीवन का अवतरण, न भाषा,न सामर्थ्य, चलना, बोलना सब शू … more →
ramadwivedi wrote 7 months ago: क्या युग का यह कमाल है? कि हर तरफ सवाल है। सवाल के ज़वाब में, सवाल ही … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: चुप-चुप रह कर आंसू पीना, आसान न यह गम होता है। मिट-मिट कर … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: हे मानव ! तुम वटवृक्ष मत बनो, नई पौध को भी उगने दो, … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: किसी को हद से ज्यादा मत चाहो? पूरा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है। … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: यह माना नहीं है, हुनर कोई मुझमें, मगर एक दिल था , … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: ‘क्लोन’ बेबी “ईव” जबसे आया है, … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: नगरों में औद्यॊगिक बस्तियां हंस रही हैं, किन्तु चरित्र की दुल्हन आह … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: घर सिर छिपाने के लिए भी होते हैं घर रिश्ते बनाने के लिए भी होते ह … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: आजकल हर जगह चमचे आ गये हैं, प्रशंसा पाने के सस्ते ढंग लोगों को भा गये हैं। इसलिए आज से चमचे खरीदने … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: कहने को इक्कीसवीं सदी,पर बर्बरता का नंगा नाच यहां। … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: तुम जा रहे हो दूर,घर से बहुत दूर एक ल … more →