हम भी हरे थे,चुलबुले थे, ज़िन्दगी के हर रंग जिये थे आज हम मुरझा गये हैं दुख के बादल छा गये हैं। ज़िन्दगी की शाम में देगे नहीं कोई सदा हम, आखिरी लम्हें तो जी लें कल कहेंगे अलविदा हम। शिकवा नहीं कोई किस… more →
अनुभूति कलशramadwivedi wrote 1 week ago: हम भी हरे थे,चुलबुले थे, ज़िन्दगी के हर रंग जिये थे आज हम मुरझा गये हैं दुख के बादल छा गये हैं। ज़िन … more →
ramadwivedi wrote 7 months ago: कहीं अहसास बिकते हैं, कहीं विश्वास बिकते हैं, अगर दिल टूट जाए तो, दीवाने खास बिकते हैं। कहीं मेंहदी … more →
ramadwivedi wrote 8 months ago: कविता कामिनी भी है, कविता दामिनी भी है, कविता रूठ जाए गर, दंशदायिनी भी है। कविता मनोहारिणी, कविता शक … more →
ramadwivedi wrote 8 months ago: हर साँस दे दी तुमको, अपने न बन सके तुम, माना था तुमको हीरा, कंकर निकल गए तुम । रोपा था प्रेम-पौधा, स … more →
ramadwivedi wrote 9 months ago: इंसान के दिल में गुरूर कितना? इंसान बन गया है मग़रूर कितना? चूर-चूर चाहे हो जाए ज़िन्दगी, झुकता नहीं क … more →
ramadwivedi wrote 9 months ago: शुभ्र-धवल,कमलासना, हंसवाहिनी,माँ शारदे। सप्त सुरों की साधिका, नमो नमामि,नमामि माँ॥ अन्तस में तेरा ही … more →
ramadwivedi wrote 10 months ago: शून्य! जीवन- यात्रा का आरंभ, जन्म जीवन का अवतरण, न भाषा,न सामर्थ्य, चलना, बोलना सब शून्य, माँ का दुग … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: क्या युग का यह कमाल है? कि हर तरफ सवाल है। सवाल के ज़वाब में, सवाल ही सवाल हैं। सवाल इक सुलझ गया, सवा … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: चुप-चुप रह कर आंसू पीना, आसान न यह गम होता है। मिट-मिट करक … more →
ramadwivedi wrote 1 year ago: … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: हे मानव ! तुम वटवृक्ष मत बनो, नई पौध को भी उगने दो, … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: किसी को हद से ज्यादा मत चाहो? पूरा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाता है। … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: यह माना नहीं है, हुनर कोई मुझमें, मगर एक दिल था , … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: ‘क्लोन’ बेबी “ईव” जबसे आया है, … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: नगरों में औद्यॊगिक बस्तियां हंस रही हैं, किन्तु चरित्र की दुल्हन आहे … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: घर सिर छिपाने के लिए भी होते हैं घर रिश्ते बनाने के लिए भी होते है … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: आजकल हर जगह चमचे आ गये हैं, प्रशंसा पाने के सस्ते ढंग लोगों को भा गये हैं। इसलिए आज से चमचे खरीदने क … more →
ramadwivedi wrote 2 years ago: कहने को इक्कीसवीं सदी,पर बर्बरता का नंगा नाच यहां। … more →