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Blogs about: सृजन

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सृजन पर नारी की अनुभूति:ओशो के शब्द 3 comments

Meena Jain wrote 1 week ago: विगत कई वर्षोंसे मैं सृजन के बारे में सोचती रहीहूँ लेकिन उसे सही शब्द नहीं दे पा रही थी । तभी ओशो को … more →

Tags: woman

पहचान के लिए परेशान पूरा ज़माना-हिन्दी चिंतन और कविता (trouble of identity-hindi article and poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: प्राकृतिक का नियम है परिवर्तन! दिन हुआ है तो रात भी होगी। सूरज उगा है तो जरूर डूबेगा। धूप है तो अंधे … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, आस्था, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप

जख्म और मरहम-व्यंग्य कविता (zakhma aur marham-vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago:  हमने कहा था ‘जख्म पर मरहम लगा दो’ उन्होंने नमक छिड़क दिया। पीड़ा से हम कराहते रहे उन्होंने कहा ‘ … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika, friednds, hindi megazine

प्रजातंत्र में ब्लॉग की महत्वपूर्ण भूमिका-हिंदी लेख (democracy and hindi blog-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →

Tags: Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, साहित्य

गुलाम कर रहे राज़-त्रिपदम (gulam kar rahe raj-tripadam)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गुलाम राज कर रहे हैं यहां गुलाम पर। कोई छोटा है कोई उससे बड़ा यूं नाम भर। हुक्म चले नहीं पहुंचता है म … more →

Tags: writing, हिन्दी, inglish, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, साहित्य, arebic, bharat

शिशुओं का क्रीड़ाश्रम और मिठाई-हिन्दीहास्य व्यंग (child story and sweats-hindi vyanga

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर प … more →

Tags: abhivyakti, Anubhuti, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कहानी, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम

विदुर दर्शन-सात्विक कार्य सिद्ध न हो भी चिंता नहीं

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: मिथ्यापेतानि कर्माण सिध्येवुर्यानि भारत। अनुपायवुक्तानि मा स्म तेष मनः कृथाः।। हिंदी में भावार्थ-मिथ … more →

Tags: आध्यात्म, आलेख, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, संपादकीय, संस्कार, समाज

न सतयुग, न कलियुग-हास्य कविता (satyug aur kaliyug-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज, हास्य कविता

कभी अच्छा,कभी बुरा-हिंदी शायरी (sum good sum bed-hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: एक दिन घूमते हुए उसने चाय पिलाई तब वह अच्छा लगा कुछ दिन बाद वह मिला तो उसने पैसे उधार मांगे तब वह बु … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, अनुभूति, bharat, E-patrika, दीपकबापू, दीपक भारतदीप, Deepak bharatdeep, Deepak bapu

भारतीय मीडिया और चीन-हिंदी व्यंग्य (bhartiya prachartantra aur china-hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: मीडिया यानि टीवी चैनल और समाचार पत्र-जिनकों हम संगठित प्रचारतंत्र भी कह सकते हैं-बिना सनसनी के नहीं … more →

Tags: writing, हिन्दी, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, हिंदी साहित्य, arebic

सच का सामना और हास्य कवि-हास्य व्यंग्य कविता (face for trutu and hindi poet-hasya kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: उन सज्जन ने सच की पहचान करने वाली मशीन की दुकान लगाई पर उसके उद्घाटन के लिये कोई तैयार नहीं हुआ भाई। … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, समाज

असमंजस-हिंदी लघुकथा (hindi lagu katha)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: पिता ने अपनी पूरी जिंदगी छोटी दुकान पर गुजारी और वह नहीं चाहते थे कि उनका पुत्र भी इसी तरह अपनी जिंद … more →

Tags: Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, शादी, सूचना

अनंत शब्दयोग को ऐलेक्सा ने दिया आठवां नंबर-संपादकीय (anant shabdyog trafic rank 8)

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: यह दिलचस्प भी और अविश्वसनीय भी। अक्सर ब्लाग लेखक अपने ब्लाग के लिये ऐलेक्सा का प्रमाण देते हैं। इस ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, भाषा, मस्तराम, समाज

॑सृजन

रविकुल wrote 5 months ago: भ्रष्ट समाज का उत्कर्ष करो ! जीवन है संघर्ष संघर्ष करो !! मिटा डालो उग्रता के निशां, बदल डालो भ्रमित … more →

Tags: कवितायें, उत्कर्ष, नींव, उग्रवाद, इन्सां, अर्जुन

कुछ सच कुछ झूठ-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: शादी में वह बच्चा अपने मां बाप और दादा के साथ गया। शादी उच्च घराने की थी। वहां तमाम तरह का तामझाम था … more →

Tags: writing, हिन्दी, inglish, दीपक द्वारा, व्यंग्य चिंतन, चिन्तन, India, हास्य व्यंग्य, media

आशीर्वाद-लघुकथा2 comments

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जा … more →

Tags: writing, हिन्दी, inglish, दीपक द्वारा, India, साहित्य, Internet, online journalism, Family

युवा पीढ़ी को प्रोत्साहन-(हास्य व्यंग्य)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: वह पुराना अभिनेता अपने बैठक कक्ष में सिगरेट पर सिगरेट फूंकता हुआ इधर से उधर चहलकदमी कर रहा था। उसने … more →

Tags: writing, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, अनुभूति, साहित्य, Internet, online journalism

सबकी नज़र है हमारे कमाने पर -व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: रात की रौशनी में चमकने वाले चेहरे सुबह सूरज की पहली किरण में ही फक नजर आते हैं। सौंदर्य के सच की धूप … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, चिन्तन, अनुभूति, हिंदी साहित्य, web duniya, hindi story, web dunia, web bhaskar

गंगा और यमुना नदियों की तरह होता है हिन्दी भाषा का दोहन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: अंतर्जाल पर हिंदी में सक्रिय कई ऐसे ब्लाग लेखक हैं जिन्हें लिखते हुए छह साल हो गये हैं। उन लोगों की … more →

Tags: writing, inglish, दीपक द्वारा, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, Internet, Urdu, arebic


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