शादी में वह बच्चा अपने मां बाप और दादा के साथ गया। शादी उच्च घराने की थी। वहां तमाम तरह का तामझाम था जिसमें बच्चों के मनोरंजन के लिये तीन ऐसे लोगों का भी प्रबंध जो विचित्र कपड़े और मुखौटे पहने थे। वह … more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकारविकुल wrote 5 days ago: भ्रष्ट समाज का उत्कर्ष करो ! जीवन है संघर्ष संघर्ष करो !! मिटा डालो उग्रता के निशां, बदल डालो भ्रमि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शादी में वह बच्चा अपने मां बाप और दादा के साथ गया। शादी उच्च घराने की थी। वहां तमाम तरह का तामझाम थ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वह पुराना अभिनेता अपने बैठक कक्ष में सिगरेट पर सिगरेट फूंकता हुआ इधर से उधर चहलकदमी कर रहा था। उसने … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: रात की रौशनी में चमकने वाले चेहरे सुबह सूरज की पहली किरण में ही फक नजर आते हैं। सौंदर्य के सच की धूप … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अंतर्जाल पर हिंदी में सक्रिय कई ऐसे ब्लाग लेखक हैं जिन्हें लिखते हुए छह साल हो गये हैं। उन लोगों की … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: इस देश में कई ऐसे लोग है जो अमिताभ बच्चन के अभिनय और आवाज से अधिक उनके व्यक्तित्व और वक्तव्यों से … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पता नहीं क्यों भारत के लेखकों और बुद्धिजीवियों एक तरफ से तो देशप्रेम से ओतप्रोत रहते हैं दूस … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जमीन पर आते हुए इंसान ने सर्वशक्तिमान से कहा ‘इस बार इंसान बनाया है इसके लिये शुक्रगुजार हूं पर मुझे … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: एक बात निश्चित है कि धर्म नितांत एक निजी विषय है और उस पर सार्वजनिक विषय पर चर्चा करना केवल एक दिखाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: बहुत दिन से हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आखिर कौन किसको क्या और क्यों समझा रहा है? कब समझा … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: लोग आज इसे हिंदी दिवस कह रहे हैं पर एक हिंदी विद्वान का मत है कि इसे भारतीय भाषा दिवस के रूप में मना … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: आज यह दूसरा ब्लाग/पत्रिका है जिसने 30 हजार पाठ/पाठक संख्या को पार किया। इससे पहले हिंदी पत्रिका ने इ … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: इस प्रथ्वी पर जीवन अपनी सहज धारा से बहता जाता है। अनेक आपदायें इस प्रथ्वी पर आती हैं पर फिर सब कुछ स … more →
दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मेरा यह ब्लाग@पत्रिका पाठक संख्या 25 हजार पार कर गया। वेसे देखा जाये कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लागर साइकिल चलाता हुआ घर पहुंचा तो पत्नी ने उसे देखते ही पूछा-‘क्या कहीं कीचड़ में गिर गये थे जो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहते हैं पत्थर के बुतों में भगवान नहीं मानेंगे पर भगवान के बुत उड़ाने पहुंच जाते जवाब नहीं देना इसल … more →