ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः मेरे लिखे को कुछ लोग पढ़ते हैं और उसमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी मंशा से मुझे अवगत भी कराते हैं. इंटरनेट की दुनिया में भाषाई अल्पसंख्यकों का यह बर्ताव प्रेरक है. मैं खुद भी … more →
अलखबाड़ाalakh niranjan wrote 2 years ago: ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः मेरे लिखे को कुछ लोग पढ़ते हैं और उसमें से कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी मंशा से … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: मैं यहां ज्ञान बघारने नहीं आया हूं. मैं ज्ञानी हूं भी नहीं. मैं एक यथार्थवादी मनुष्य हूं जो अपने पे … more →