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मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ7 comments

Rohit Jain wrote 8 months ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, ही, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई

Rohit Jain wrote 1 year ago: काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई दिल की हिम्मत से सुनो झुक जाते हैं लश्कर कई ये जो मतलबी जह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Jan 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है झूमता गाता हुआ हर मंज़र देख है राह में मिलनेवालों से लेते हैं अपनी … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Jan 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Dec 2007, 2007, अफ़साना, कविता, गज़ल, जैन, बिखरा

इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क् … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Dec 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है इक गद्दार ग़रेबां से ईमान की खुशबू आई है हमने ये ना जाना … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, में, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता

दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया मै ज़िंदगी से और आशना हो गया दोस्तों का इखलास परखने जो चला मै दुश्मनों … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Jun 2007, 2007, आज, कविता, का, गया, गज़ल

दिल में अजब से ख़यालात हैं

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल में अजब से ख़यालात हैं आज उनसे पहली मुलाक़ात है ज़ुल्फ़ें जो बिखरीं तो फ़िर क्या कहें लगा दिन में जैस … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, में, दिल, हैं, अजब, ख़यालात

झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा

Rohit Jain wrote 1 year ago: झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आधी आधी माहताब आधा आधा देखनेवालों संभल जाओ ज़रा तुम है आज उनके र … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, JAN 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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