किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों की दुआ से ड़रते हैं इश्क़ होने का हमको ख़ौफ़ नहीं हम तो बस इंतेहा से ड़रते हैं किसी इन्सान से घबराएं… more →
इक शायर अंजाना सा...wrote 5 months ago: किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों … more →
wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →
wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →
wrote 1 year ago: काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई दिल की हिम्मत से सुनो झुक जाते हैं लश्कर कई ये जो मतलबी जह … more →
wrote 1 year ago: जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है झूमता गाता हुआ हर मंज़र देख है राह में मिलनेवालों से लेते हैं अपनी … more →
wrote 1 year ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं … more →
wrote 1 year ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क् … more →
wrote 1 year ago: बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है इक गद्दार ग़रेबां से ईमान की खुशबू आई है हमने ये ना जाना … more →
wrote 1 year ago: दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया मै ज़िंदगी से और आशना हो गया दोस्तों का इखलास परखने जो चला मै दुश्मनों … more →
wrote 1 year ago: दिल में अजब से ख़यालात हैं आज उनसे पहली मुलाक़ात है ज़ुल्फ़ें जो बिखरीं तो फ़िर क्या कहें लगा दिन में जैस … more →
wrote 1 year ago: झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आधी आधी माहताब आधा आधा देखनेवालों संभल जाओ ज़रा तुम है आज उनके र … more →