हमारे समाज में यह आम धारणा है कि व्यक्ति विशेष तो अपने दम पर बहुत कुछ अर्जित कर सकता है, सफलता की नयी-नयी ऊँचाइयां छूकर नित नये मानदण्ड स्थापित कर सकता है, परन्तु उसके इस विकास में हमारे देश के मूलभूत… more →
वन्दे मातरम्स्वाधीन wrote 2 years ago: हमारे समाज में यह आम धारणा है कि व्यक्ति विशेष तो अपने दम पर बहुत कुछ अर्जित कर सकता है, सफलता की नय … more →
स्वाधीन wrote 2 years ago: कला और विज्ञान को आमतौर पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है. अंग्रेज़ों द्वारा तैयार की गयी वर्तमान … more →
स्वाधीन wrote 3 years ago: यह आलेख मूलत: एक टिप्पणी का जवाब है जो हमारे पिछले आलेख पर आयी थी (हमारे अंग्रेज़ी चिट्ठे में) टिप्पण … more →
स्वाधीन wrote 3 years ago: गतांक से आगे… अब आप पूछेंगे, कि अगर इतना सब हो रहा है तो फिर आप ”वंदे मातरम्” पर य … more →
स्वाधीन wrote 3 years ago: हमें शिकायत है, सारे जहां से शिकायत है. क्या कहा? क्यों? कभी भारत देश के बाहर किसी विकसित देश में नि … more →
स्वाधीन wrote 3 years ago: बात महाराष्ट्र की धुलिया जेल की है. साल था १९३२. ब्रिटिश सरकार ने स्वाधीनता आन्दोलन में भाग लेने के … more →
स्वाधीन wrote 3 years ago: ज्ञान की प्राप्ति का सही मार्ग क्या है? वह कौन सी दिशा है जिसका अनुकरण करने पर ज्ञान के साथ साक्षात् … more →
स्वाधीन wrote 3 years ago: बात कुछ ज़्यादा पुरानी नही है, शायद १५ अगस्त २००६ की ही है. ‘आज तक’ चैनल पर एक समाचार दिख … more →