जितना होता है, उतनी ही उसकी आदत हो जाती है। जितनी आदत होती है, उतना ही दर्द कम होता है (दर्द कम नहीं होता, हमारा ध्यान कम हो जाता है)। दर्द भी मायूस होकर चला जाता है – जहाँ प्यार ना मिले वहाँ क्… more →
ठेले पे हिमालयदीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक तलाश पूरी होते ही आदमी दूसरी में जुट जाता अंतहीन सिलसिला है अपने मकसद रोज नये बनाता पूरे होते ही … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: सतरंगी भाव उमड़ते हैं, दौड़ते हैं, तेज़ दौड़ते हैं इतने तेज़ कि कुछ स्पष्ट नहीं रह पाता मानो ऊर्जा से चाल … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने … more →
विनय wrote 1 year ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं उनके दीदार से जो मुझे सुकून है … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ कभी दिल कहे उसे अपना बना लूँ कभी दिल … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →
Gaizabonts wrote 2 years ago: जितना होता है, उतनी ही उसकी आदत हो जाती है। जितनी आदत होती है, उतना ही दर्द कम होता है (दर्द कम नहीं … more →
Gaizabonts wrote 3 years ago: अगर यह भाषा में अस्तित्व की खोज है, इस तरह कहीं अस्तित्व ही न खो जाए! … more →
Gaizabonts wrote 3 years ago: एक जीवन ऐसा ही है आपके द्वार के आगे खटखटाते रह गये आप आयें न पिया आप तो बना गये अपनी ही नियम यहाँ मे … more →
Gaizabonts wrote 3 years ago: बहुत दिन हुए, हिन्दी में लिखे हुए। शायद यहाँ, वर्डप्रेस पर और लिखा जायेगा। नई शुरुआत करने के कारण कई … more →
Gaizabonts wrote 3 years ago: आप जानते है, यहाँ आपके बहुत निष्ठावान प्रशंसक है। -उन्हें मित्र कहें, प्रशंसक नहीं। छोडिये, अब अधिक … more →